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काले धन को खपाने का जरिया बनी बिटकॉइन्स ऑनलाइन करेंसी

Choosing bitcoins, businessman pressing touch screen button.

नई दिल्ली : डिजिटल करेंसी उन कर चोरों तक पहुंचा रहे हैं जो अपनी काली कमाई के लिए सुरक्षित ठिकाने तलाश रहे हैं. इस धंधे का जरिया बनी हुई बिटकॉइन्स ऑनलाइन करेंसी. ये एक तरह की आभासी करेंसी हैं जिसका हवाला ऑपरेटर और अपराधियों की ओर से वसूली, ड्रग्स के काले कारोबार और यहां तक की सुपारी लेकर हत्याओं का भुगतान करने के लिए किया जाता हैं. बिटकॉइन्स के अप्रतिबंधित ऑनलाइन बाजार के एजेंट इस आभासी करेंसी का इस्तेमाल काले धन को इंटरनेट पर खपाने में कर रहे हैं.

बता दें कि बिटकॉइन्स विश्व में मुद्रा नियमन वाली संस्थाओं की पकड़ से अब भी बाहर है. इन्हें कंप्यूटर्स की मदद से संचालित किया जाता है. इसे गुप्त करेंसी भी कहा जाता है. इसके जरिए इंटरनेट पर उत्पादों और सेवाओं को बेचा और खरीदा जाता है. बिटकॉइन्स को 2008 में ‘सटोशी नाकामोटो’ के झूठे नाम से बनाया गया था. इन्हें आभासी बैंक खाते में जमा रखा जाता है. इनका इस्तेमाल करने वालों को ट्रांजेक्शन्स के लिए अपना वास्तविक नाम बताने की जरूरत नहीं होती. ये सिर्फ वॉलेट आईडी से पहचाने जाते हैं.

Zebpay भारत में बिटकॉइन ट्रेडिंग के लिए एक्सचेंज है. ‘अगर 1,000 (बिटकॉइन) चाहते हैं तो आपको मिल जाएंगे. दोबारा भुगतान किश्तों में होगा. जैसे कि एक वक्त में 5 लाख से 6 लाख रुपए.’ बिटकॉइन्स के बदले बंद हो चुके 1000 रुपए के नोट स्वीकार करने को तैयार है.

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) आभासी करेंसी के ट्रेडर्स को पहले ही इसके कानूनी और वित्तीय जोखिमों के बारे में आगाह कर चुका है. 2013 में RBI ने चेतावनी दी थी कि इस तरह के ट्रांजेक्शन्स मनी लॉन्ड्रिंग और आंतकवाद को फंडिंग की रोकथाम वाले कानूनों के उल्लंघन की श्रेणी में आ सकते हैं. इस सब के बावजूद बिटकॉइन्स के सीक्रेट नेटवर्क के दलाल बेखौफ टैक्स लूट के पैसे को आभासी करेंसी में बदल कर अपने लिए मोटी कमाई का रास्ता ढूंढ रहे हैं.

जैसे जैसे बिटकॉइन्स के बारे में देश में जानकारी बढ़ रही है, इसकी कीमत भी बढ़ती जा रही है. बिटकॉइन के देश में दाम अमेरिका से 8 फीसदी ज्यादा हैं. भारत में बिटकॉइन ट्रेडिंग बहुत छोटे पैमाने पर है. हर दिन देश में 5 करोड़ रुपए की बिटकॉइन डीलिंग होती है. वहीं चीन में हर दिन 10,000 करोड़ रुपए और अमेरिका में 2,000 करोड़ रुपए बिटकॉइन ट्रेड होता है.

बिटकॉइन को लेकर देश में तस्वीर अब भी धुंधली है लेकिन फिर भी ये किसी भी फॉरेन एक्सचेंज ट्रेड, स्टॉक इंडेक्स और कॉमोडिटी कॉन्ट्रेक्ट से अच्छा निवेश साबित हो रहा है. तेल और सोने की तरह ट्रेड होने वाला इलेक्ट्रॉनिक कॉइन 2016 के शुरु से अब तक 79 फीसदी उछाल ले चुका है. अब इसका मूल्य 778 डॉलर तक पहुंच चुका है. ये 2014 से अब तक का सबसे ऊंचा मूल्य है.

बिटकॉइन्स कैसे बेचे/खरीदे जाते हैं?
– बिटकॉइन्स एक्सचेंज के जरिए
– विभिन्न करेंसी के जरिए
– ऑनलाइन ट्रांजेक्शन
– भारत के लोकप्रिय ऐप Zebpay के जरिए

बिटकॉइन्स कैसे ट्रांसफर होते हैं?
– मोबाइल ऐप्स के जरिए
-डिजिटल ट्रांसफर
– पीर-टू-पीर ट्रांजेक्शन (एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को)
-डिजिटल वॉलेट्स

बिटकॉइन्स कैसे पैदा होते हैं?
-इंटरनेट माइनिंग के जरिए
– मैथ्स पज्जल्स को सुलझाने से
– सीमित सर्कुलेशन

बिटकॉइन्स की कालाबाजारी कैसे होती है?
– पूरी तरह कैश के जरिए
– दलालों की ओर से ट्रांसफर के जरिए
– गुप्त ट्रांसफर
– कैश में ऑफलाइन दोबारा बेचे जाना

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