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काज़ी के फरमान से नहीं तय होते हैं मुस्लिम मत

यूपी विधानसभा चुनाव की तैयारियां ज़ोरों पर हैं. पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 26 जिलों में फैली हुई 140 विधानसभा सीटों पर 11 और 15 फरवरी को मतदान होना है. इन जिलों में मुस्लिम समुदाय की अच्छी-खासी मौजूदगी है. इस चुनाव में यह तबका किसके पक्ष में वोट डालेगा, फिलहाल इसे लेकर तमाम कयास लगाए जा रहे हैं।

उत्तर प्रदेश की जनसंख्या में मुस्लिमों की आबादी करीब 19 फीसदी है। शहरी इलाकों में उनकी मौजूदगी करीब 32 प्रतिशत और ग्रामीण इलाकों में 16 फीसद है। मायावती की भी इस समुदाय के मतों पर नजर है।

शायद इसी कोशिश में उन्होंने 97 मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं। अब तक बहुजन समाज पार्टी ने इतनी बड़ी संख्या में कभी मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट नहीं दिया था। समाजवादी पार्टी के मुस्लिम प्रत्याशियों की संख्या 56 है। वहीँ भाजपा ने 370 उम्मीदवारों की जो लिस्ट जारी की है, उसमें एक भी मुस्लिम नाम शामिल नहीं है।

उत्तर प्रदेश की जनसंख्या के मुकाबले पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुस्लिम समुदाय की आबादी ज्यादा (करीब 26 प्रतिशत) है। रामपुर, मुरादाबाद, अमरोहा, साहा अमरोहा, सहारनपुर और बिजनौर में मुस्लिमों की आबादी ज्यादा है। संभल में तो कुल आबादी का लगभग 70 प्रतिशत मुसलमान हैं। यहां कई जातियां ऐसी हैं जो कि हिंदू और मुस्लिम, दोनों ही समुदायों में पाई जाती हैं। त्यागी, जाट और गुर्जर हिंदुओं में भी होते हैं और मुसलमानों में भी।

सहारनपुर के शहर काजी नदीम अख्तर अंग्रेजी स्कूल से पढ़े हुए हैं। उन्होंने मैनेजमेंट और कानून दोनों में डिग्रियां लीं, लेकिन फिर उन्होंने धर्म के रास्ते को चुना। अख्तर बताते हैं, ‘आमतौर पर माना जाता है कि मुस्लिम सामुदायिक तौर पर निर्णय लेकर वोट देते हैं, लेकिन यह गलत है। जमातों में किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को वोट देने संबंधी कोई फरमान नहीं जारी किया जाता है।’

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