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किसानों के आत्महत्या को रातोंरात नहीं सुलझाया जा सकता है- सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने फसल बीमा योजना जैसी किसान समर्थक योजनाओं के प्रभावी नतीजे आने के लिए कम से कम एक साल के समय की आवश्यकता संबंधी केन्द्र की दलील से सहमित व्यक्त करते हुए कहा कि किसानों के आत्महत्या के मामले को रातोंरात नहीं सुलझाया जा सकता है।

प्रधान न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड की पीठ ने सुनवाई के दौरान यह बात कही। पीठ ने केन्द्र को समय देते हुए गैर सरकारी संगठन सिटीजन्स रिसोर्स एंड एक्शन इनीशिएटिव की जनहित याचिका पर सुनवाई 6 महीने के लिए स्थगित कर दी।

केन्द्र की आेर से अटार्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल ने राजग सरकार द्वारा उठाए गए किसान समर्थक माम उपायों का हवाला दिया और कहा कि इनके नतीजे सामने आने के लिये सरकार को पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए।

न्यायालय ने शुरू में कहा कि किसानों की आत्महत्या के मामलों में वृद्धि हो रही है परंतु बाद में वह सरकार की दलील से सहमत हो गया और उसे समय प्रदान कर दिया।

इस बीच, पीठ ने केन्द्र से कहा कि वह किसानों के आत्महत्या के मामले से निपटने के उपाय करने के बारे में गैर सरकारी संगठन की आेर से वरिष्ठ अधिवक्ता कोलिन गोन्सालिवज के सुझावों पर विचार करें। न्यायालय गुजरात में किसानों के आत्महत्या के मामले बढऩे को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा था।

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