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किसानों से किए गए वादों की तकमील की जाये

2014 के आम चुनाव से पहले टी आर एस पार्टी ने अपने चुनाव मंशूर में सफ़ा नंबर 9 में ज़रई शोबा से मुताल्लिक़ा दिए गए यकीन और वादे में सभी किसानों को एक लाख रुपये क़र्ज़ की माफ़ी का एलान किया था, अवाम ने इस पर यक़ीन करके उन्हें वोट दिया और इक़तिदा

2014 के आम चुनाव से पहले टी आर एस पार्टी ने अपने चुनाव मंशूर में सफ़ा नंबर 9 में ज़रई शोबा से मुताल्लिक़ा दिए गए यकीन और वादे में सभी किसानों को एक लाख रुपये क़र्ज़ की माफ़ी का एलान किया था, अवाम ने इस पर यक़ीन करके उन्हें वोट दिया और इक़तिदार हवाले किया है।

चुनांचे मंशूर में किए गए वादे को बहरसूरत बगै़र किसी शर्त के पूरा किया जाना चाहीए। ग़ैर मशरूत तरीका-ए-कार पर दुबारा ज़रई अग़राज़ के लिए क़र्ज़ भी दिए जाने की किसानों ने उम्मीद की है और इसी आस में बैठे हैं।

पूनम प्रभाकर ने कहा कि इस लिए टी आर एस हुकूमत किसानों को मायूस ना करे। साबिक़ एम पी ने कहा कि हुकूमत की तरफ से शराइत के मुताबिक़ 30 फ़ीसद किसानों को भी फ़ायदा हासिल नहीं होगा हर किसान के क़र्ज़ की ग़ैरमशरूत तौर पर माफ़ी से किसानों के ख़ानदानों को ख़ुशी होगी। उन्होंने कहा कि टी आर एस ने अपने चुनाव मंशूर में पहली तर्जीह सभी किसानों को एक लाख रुपये क़र्ज़ माफ़ी का जो ज़िक्र किया है इस के मुताबिक़ इक़तिदार पर फ़ाइज़ होने के बाद मंशूर के मुताबिक़ अमल आवरी के पहले एलान ने ही किसानों को उलझन में डाल दिया है।

ज़रई शोबा से वाबस्ता हर किसान को हर तरह से फ़ायदा पहुंचे यानी ज़रई क़र्ज़ तवील मुद्दती हो या गोल्ड लोन या फ़सल पर लिए गए ज़रई क़र्ज़ माफ़ करते हुए रियासत के किसानों का भरोसा हासिल करना चाहीए। पूनम प्रभाकर ने कहा कि इस तरह के मुतालिबात को सियासी पार्टीयों का मुख़ालिफ़ाना रवैय्या ना समझा जाये।उन्होंने कहा कि इस ख़रीफ़ सीज़न से पहले क़र्ज़ माफ़ करके दुबारा किसानों को ज़रई खाद वग़ैरा सब्सीडी क़ीमतों पर फ़राहम करने के फ़ौरी इक़दामात किए जाने चाहीए।

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