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“किस को अपनावुं में किस को छोडुं ज़फ़र “

बदलते राजनितीक‌ हालात में एक सियासी पार्टी उलझन का शिकार

बदलते राजनितीक‌ हालात में एक सियासी पार्टी उलझन का शिकार
हैदराबाद ( सियासत न्यूज़ ) राजय‌ में उपचुनाव‌ के नतिजों पर नई राजनितीक‌ सफ़ बंदियां लगभग‌ यक़ीनी दिखाई देती हैं और रियासती सतह पर कुछ उथल पुथल और वफ़ादारियों में तबदीली आसकती है एसे में एक पार्टी के लिए हालात‌ पेचीदा होते दिखाई दे रहे है ।

जहां कांग्रेस और तेल्गुदेशम पार्टी रियासती सतह पर जगन मोहन रेड्डी की वाई एस आर कांग्रेस के उभरने के इमकानात की वजह से परेशान हैं वहीं एक मुक़ामी पार्टी भी अपनी वफ़ादारियों के मसले पर परेशानीयों में फंसी हुई है और सब से ज़्यादा ज़हनी कश्मकश का शिकार दिखाई देती है ।

ये मुक़ामी पार्टी अपनी सियासत चलाने के लिए कांग्रेस से नजदीकि को बरक़रार रखने या फिर अपनी वफ़ादारियां जगन मोहन रेड्डी के साथ करने के मसले पर गौर करती दिखाई देती है । जहां इस के सामने कांग्रेस के साथ बंधे रहने और सोनिया गांधी से अपनी वफ़ादारियां चुडे रखने की मजबूरी है वहीं ये जमात रियासती सतह पर जगन मोहन रेड्डी की बढ़ती हुई ताक़त और सियासी असर ,रुसूख़ को भी नज़रअंदाज नहीं कर सकती ।

एसी सूरत में ये पार्टी सौच रही है कि किस का साथ निभाया जाए और किस को छोड़ दिया जाए । पार्टी के बाज़ करीबी ज़राए(सुत्रो) का कहना है कि पार्टी की क़ियादत दोनों पार्टीयों से वफ़ादारियां हाहिर‌ कर सकती है ।

क़ौमी सतह पर नुमाइंदगी करने वाले एमपी बहरसूरत सोनिया गांधी को अपनी वफ़ादारी का यक़ीन दिलाते रहेंगे और कांग्रेस का साथ छोड़ने से दुर रहेंगे जबकि रियासत में नुमाइंदगी करने वाले असेंबली सदस्य‌ जगन मोहन रेड्डी से दोस्ती बढ़ाने और उन्हें अपनी वफ़ादारियों का यक़ीन दिलाने की कोशिश करेंगे जिस तरह वो पहले तेल्गुदेशम प्रमुख‌ मिस्टर चंद्रा बाबू नायडू से ताल्लुक़ात(संबधों) को बेहतर रखने की कोशिश करते रहे थे ।

इस पार्टी के सामने असल मसला ये है कि वो सोनिया गांधी या जगन मोहन रेड्डी दोनों में किसी एक का साथ नहीं दे सकति और ना किसी का खुले आम साथ छोड़ सकति हैं। जहां तक सोनीया गांधी और कांग्रेस से दूरी का सवाल है तो इस पार्टी को ये फ़िक्र सताती है कि अगर सोनिया का साथ छोड़ दिया जाए तो कहीं उन का हाल भी जगन की तरह ना कर दिया जाए जिन्हें कई मुक़द्दमों में पकडा गया है ।

दूसरी तरफ‌ जगन से दूरी भी बरक़रार नहीं रखी जा सकती क्योंकि उन्हें ये भी ख़ौफ़ है कि जगन मोहन रेड्डी जहां कुल हिंद सतह की कांग्रेस पार्टी और सोनीया गांधी से टक्कर ले सकते हैं तो उन से भी बिगाड़ पार्टी क़ियादत के लिए फाइदामंद‌ नहीं होगा । इसे में इस पार्टी को अपने फाइदों और मुस्तक़बिल(भविष्य) में ताल्लुक़ात(संबधों) की फ़िक्र है और वो अपने फाइदों की ख़ातिर दोनों ही पार्टीयों को झांसे में रखने और हर एक को वफ़ादारी का यक़ीन दिलाने की कोशिशों में लगु हुइं हैं।

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