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कुंबले को ही मिलेगी 2019 तक कोचिंग की ज़िम्मेदारी

दिल्ली : टीम इंडिया के मौजूदा हेड कोच अनिल कुंबले को तमाम विवादों के बावजूद अगले दो साल के लिए कोच बनना लगभग तय हो गया है. लंदन में सौरव गांगुली, सचिन तेंदुलकर और वीवीएस लक्ष्मण वाली सलाहकार समिति के फैसले ने इस बात की तरफ इशारा किया है. हालांकि, बीसीसीआई की आधिकारिक प्रेस रिलीज़ में फिलहाल यही कहा गया है कि समिति की लंदन में बैठक हुई और नए कोच के फैसले के बारे में बीसीसीआई को सही समय पर बता दिया जाएगा.

सलाहकार समिति के तीन वोट में से कुंबले को 2-0 की बढ़त
लेकिन, विश्वस्त सूत्रों की माने तो कुबंले के नाम को लेकर तेंदुलकर और लक्ष्मण में किसी तरह की हिचकिचाहट नहीं है जबकि सौरव गांगुली न्यूट्रल हैं. इत्तेफाक़ से गांगुली ने चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान कॉमेंट्री करते हुए मौजूदा कोच कुबंले की काफी तारीफ की और ये भी कहा कि उनकी उपलब्धियां शानदार हैं. लेकिन, पूरे मामले में यू-टर्न विराट कोहली की बर्मिंघम में हुई प्रेस कांफ्रेस के बाद आया है. कोहली ने पहली बार सार्वजिनक तौर पर ये माना था कि कोच से उनके मतभेद ज़रूर हैं लेकिन तकरार की बात ग़लत है.

सूत्रों की मानें तो बीसीसीआई का एक बड़ा तबका और सीओए (क्रिकेट प्रशासक समिति) भी ये नहीं चाहता है कि सिर्फ कप्तान कोहली की जिद के चलते कोच का पत्ता साफ हो. मीडिया में भले ही इस बात की ख़बरें आ रही हों कि कोहली के अलावा कुछ और खिलाड़ी भी कुंबले के तरीके से खुश नहीं है लेकिन अब तक किसी ने भी आधिकारिक तौर पर इस बात की शिकायत नहीं की है.

कोहली को ज़रूरत से ज़्यादा पॉवर देना भी ठीक नहीं
क्रिकेट सलाहकार समिति का ये भी मानना है कि भारतीय क्रिकेट में इस रुख से बेहद ग़लत संदेश जाएगा अगर कुंबले को अच्छे नतीजे के बाद एक्सटेंशन न मिले. हां, अगर कुंबले खुद से इस रेस से अपना नाम वापस ले लेते तो शायद वीरेंद्र सहवाग के लिए कोच बनना बेहद आसान हो जाता. लेकिन, कुंबले का इस ज़िम्मेदारी के लिए दिलचस्पी दिखाना सलाहकार समिति के लिए मुश्किल पहेली बन गया. चाहकर भी, भारतीय क्रिकेट की त्रिमूर्ति कुंबले के दावे को खारिज नहीं कर सकती थी क्योंकि पिछले साल इसी समिति ने रवि शास्त्री का पत्ता काट कर कुंबले को इस ज़िम्मेदारी के लिए तैयार किया था.

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