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कुरान‌ मजीद को समझने साहिब इक़रान से ताल्लुक़ मज़बूत करने का मश्वरा

हैदराबाद ।१७ अगस्त: क़ुरआन मजीद अल्लाह का कलाम और हुज़ूर-ए-अकरम सिल्ली अल्लाह अलैहि वाला वसल्लम का सब से बड़ा मोजिज़ा ही। क़ुरआन मजीद पर अमल और इस को समझने केलिए लाज़िम हीका मुस्लमान साहब-ए-क़ुरआन ई से अपनेताल्लुक़ को मज़बूत करें

हैदराबाद ।१७ अगस्त: क़ुरआन मजीद अल्लाह का कलाम और हुज़ूर-ए-अकरम सिल्ली अल्लाह अलैहि वाला वसल्लम का सब से बड़ा मोजिज़ा ही। क़ुरआन मजीद पर अमल और इस को समझने केलिए लाज़िम हीका मुस्लमान साहब-ए-क़ुरआन ई से अपनेताल्लुक़ को मज़बूत करें। हुज़ूर-ए-अकरम सिल्ली अल्लाह अलैहि वाला वसल्लम के इशक़-ओ-मुहब्बत के साथ अगर क़ुरआन मजीद को समझने की कोशिश की जाय तो क़ुरआन के इसरार-ओ-रमूज़ आसानी से खुल जाते हैं।

हज़रात यवसफ़ीन ऒ एजूकेशनल ऐंड वीलफ़ीर ट्रस्ट और कल हिंद तंज़ीम इस्लाह मुआशरा के ज़ेर-ए-एहतिमाम बारगाह यवसफ़ीन ऒ नामपली मैं मुनाक़िदा साहब-ए-क़ुरआन कान्फ़्रैंस से ख़िताब करते हुए उल्मा मशाइख़ ने इन ख़्यालात का इज़हार किया। कान्फ़्रैंस की सरपरस्ती मौलाना फ़ैसल अली शाह चिशतीसज्जादा नशीन बारगाह यवसफ़ीन ऒ ने की। मौलाना हाफ़िज़ मुहम्मद मुज़फ़्फ़र हुसैन ख़ान कादरी सदर मर्कज़ी मीलाद जलूस ने कहा कि माह रमज़ान नफ़स की तर्बीयत का महीना ही, लेकिन बाअज़ मुस्लमान इस के बरअक्स रोज़ा खोलने मुसलसल खाना, पीना और रातों में वक़्त गुज़ारी को मामूल बना चुके हैं।

नफ़स पर कंट्रोल और इस महीना की तर्बीयत पर साल भर अमल करने की हिदायत दी गई ही। मौलाना मुहम्मद अबदुलहमीद रहमानीचिशती सदर कल हिंद तंज़ीम इस्लाह मुआशरा-ओ-निगरान जलसा ने कहा कि एक अल्लाह एक नबी और एक क़ुरआन के मानने वाले मुख़्तलिफ़ धड़ों में बट्टे हुए हैं। मौजूदा दौर में मुस्लमान अगर क़ुरआन मजीद पर अमल करें, मुत्तहिद-ओ-मुनज़्ज़म होजाएं तो दुनिया-ओ-आख़िरत में सुर्ख़रूई हासिल कर सकते हैं।

मौलाना क़ाज़ी मुहम्मद अबदूर्रज़्ज़ाक़ कादरी नक़्शबंदी ने कहा कि क़ुरआन से दूरी के सबब मुस्लमान ज़लील-ओ-ख़ार होरहे हैं। मौलानाज़िया इर्फ़ान हसामी का रद्दी ने कहा कि शब क़दर उम्मत मुस्लिमा को इस लिए दी गई कि वो इबादत गुज़ार बन जाएं। डाक्टर नसीब अहमद कादरी बीदर, डाक्टर एन ए कादरी बीदर, मौलाना हाफ़िज़ मुज़म्मिल हुसैन चिशती ने भी ख़िताब किया।

इस मौक़ा पर मौलाना मुफ़्तीमस्तान अली कादरी निज़ामी, मौलाना यूसुफ़ सूफ़ी कादरी, जनाब अबदुल क़ादिर फ़ैसल सिंगा रेड्डी, जनाब मुहम्मद मुनीर क़ुरैशी और दूसरे भी मौजूद थी। जलसा का आग़ाज़ क़ारी हबीब अली शाह कादरी इमाम मस्जिद यवसफ़ीन ऒ की क़रणत से हुआ।

क़ारी जुनैद कादरी,शफ़ी कादरी, कामिल अजमेरी ने हदया नाअत पेश किया। जनाब अरशद शरफ़ी ने निज़ामतकी और शुक्रिया अदा किया।

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