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केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने अधिकारियों को दिए निर्देश केवल ज़रूरत पड़ने पर ही किया जाए उर्दू और अंग्रेजी का इस्तेमाल

नई दिल्ली: बुधवार को केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने प्रशासनिक कार्यों में हिन्दी की उपेक्षा पर रोष जताते हुए कहा कि  यह बेहद  “शर्मनाक” है कि देश के लोग 68 साल बाद भी  अभी तक खुद को अंग्रेजी भाषा की ‘गुलामी’ से आज़ाद नहीं कर पाए हैं |

हिन्दी सलाहकार समिति की बैठक तीन साल के लंबे अंतराल के बाद होने पर भी नाराज़गी जताते हुए उन्होंने हर तीन महीने बाद बैठक बुलाने के निर्देश दिए | उन्होंने कहा कि यह बेहद शर्म की बात है ब्रिटिश राज से आज़ाद होने के 68 साल बाद भी हम ख़ुद को अंग्रेजी की गुलामी से मुक्त नहीं कर पाए हैं| जिस समाज को अपनी भाषा पर गर्व नहीं होता है वह रीढ़हीन समाज होता है |अंग्रेजी से छुटकारा नहीं मिल पाना एक मानसिक रोग है जिसका इलाज किये जाने की ज़रुरत है |

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि मंत्रालय की महत्वपूर्ण बैठकों, सम्मेलनों अन्य कार्यक्रमों के एजेंडे की तैयारी और फाइलों में  टिप्पणी लिखने के लिए हिंदी का इस्तेमाल करें | अंग्रेजी और उर्दू केवल ज़रुरत पड़ने पर ही इस्तेमाल की जाए |

केंद्रीय जल संसाधन मंत्री ने कहा कि ये भी सुनिश्चित करना होगा कि इस बैठक के दौरान लिए गये निर्णयों को एक निर्धारित समय सीमा के भीतर लागू किया जाए |

बैठक में भारती के साथ मौजूद जल संसाधन राज्य मंत्री संजीव बालियान ने उनका समर्थन करते हुए कहा कि हर किसी को हिंदी के इस्तेमाल पर गर्व होना चाहिए |

 

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