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समान नागरिक संहिता पर सरकार के खिलाफ कई मुस्लिम सांसद का एकजुट होना शुरू

नई दिल्ली : समान नागरिक संहिता देशभर में छिड़ी बहस के बीच मुस्लिम सांसद एकजुट होना शुरू हो गए हैं । कई सांसदों ने इस मामले को लेकर केंद्र सरकार पर राजनीति करने का आरोप लगाया है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि मुस्लिम संगठनों को आक्रामक रूख नहीं अपनाना चाहिए, क्यों कि भारत जैसे विविधिताओं से भरे देश में इस तरह के किसी कानून को थोपना लगभग असंभव है।

पिछले दिनों विधि आयोग ने एक प्रश्नावली सामने रखी जिसमें समान नागरिक संहिता और तीन तलाक सहित कुछ बिंदुओं पर लोगों की राय मांगी गई। बीते गुरूवार को पर्सनल लॉ बोर्ड तथा कुछ अन्य प्रमुख मुस्लिम संगठनों ने इस प्रश्नावली का बहिष्कार करने का फैसला किया और कहा कि अगर देश में समान नागरिक संहिता को लागू किया गया तो यह सभी को एक रंग में रंगने जैसा होगा जो देश के बहुलवाद और विविधता के लिए खतरनाक होगा।

जदयू सांसद अली अनवर अंसारी : कहा, सीमा पर तनाव है और ऐसे समय में देश को एकजुट रखने की जरूरत है। परंतु ऐसे मुददे को आगे बढ़ाकर ध्रुवीकरण की कोशिश की जा रही है। दरअसल, इनकी (भाजपा नीति सरकार) कोशिश इस मामले से राजनीतिक फायदा उठाने की है। सत्तारूढ़ पार्टी और सरकार इस मामले पर पूरी तरह से राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने कहा, हमारा देश विविधिताओं से भरा देश है। हर जाति समूह और संप्रदाय के अपने रीति-रिवाज एवं पर्सनल लॉ हैं। भाजपा के लोगों को पता है कि समान नागरिक संहिता लागू करना संभव नहीं है, लेकिन वे जानबूझकर इस मुद्दे को आगे बढ़ा रहे हैं।

तृणमूल सांसद सुलतान अहमद : कहा, समान नागरिक संहिता को आखिर कैसे लागू किया जा सकता है। भारतीय समाज इतना विविध है फिर सभी पर एक कानून कैसे थोपा जा सकता है। इस मामले में सिर्फ राजनीति हो रही है। हमारी मांग है कि देश के सामने खड़ी दूसरी चुनौतियों पर ध्यान दे और इस मामले को लेकर बेवजह बहस में नहीं पड़े। उन्होंने कहा, भारत जैसे देश में समान नागरिक संहिता जैसे किसी कानून को थोपना लगभग असंभव है।

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