Wednesday , October 18 2017
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केजरीवाल को अवाम से मुलाक़ात के लिए

कांग्रेस जनरल सेक्रेटरी दिग्विजय सिंह ने वज़ीर-ए-आला दिल्ली अरविंद केजरीवाल को मश्वरा दिया कि वो अपने पेशरू शीला दिक्षित‌ से कुछ सीखने की कोशिश करें जो हर हफ़्ता में छः दिन दो घंटों के लिए अवाम से मुलाक़ात किया करती थीं।

कांग्रेस जनरल सेक्रेटरी दिग्विजय सिंह ने वज़ीर-ए-आला दिल्ली अरविंद केजरीवाल को मश्वरा दिया कि वो अपने पेशरू शीला दिक्षित‌ से कुछ सीखने की कोशिश करें जो हर हफ़्ता में छः दिन दो घंटों के लिए अवाम से मुलाक़ात किया करती थीं।

सिंह ने इस बात का नोट लेते हुए कि केजरीवाल ने जनता दरबार करना रोक‌ दिया है, अपने ट्वीटर पर तहरीर करते हुए कहा कि अवामी शिकायात की समाअत के लिए एक मख़सूस निज़ामुल-अमल वज़ा किया जाना ज़रूरी है। अकेले अरविंद केजरीवाल कुछ नहीं कर सकते या अगर वो ये सोचें कि सब कुछ वो अकेले ही कर सकते हैं, तो ऐसा होना मुम्किन नहीं।

याद रहे कि गुजिश्ता हफ़्ता अरविंद केजरीवाल का पहला जनता दरबार अफ़रातफ़री का शिकार होगया था जिस के बाद उन्होंने ऐलान किया था कि जनता दरबार नहीं किए जाऐंगे और अवाम की शिकायतों के सुनवाई के लिए नए चैनल्स क़ायम किए जाऐंगे। अवाम अपनी शिकायत बज़रिया डाक या बज़रिया फ़ोन दर्ज करवा सकते हैं।

दिग्विजय सिंह ने 1994 का वो ज़माना याद किया जब वो ख़ुद मध्य प्रदेश के वज़ीर-ए-आला थे और उन्होंने अवामी शिकायत के सुनवाई के लिए एक अलाहेदा महिकमा क़ायम किया था जहां शिकायात दर्ज की जाती थीं और ऑनलाइन उनकी सुनवाई की जाती थीं।

वज़ीर-ए-आला होने के नाते वो ख़ुद भी अवाम से रोज़ाना दो घंटे मुलाक़ात किया करते थे जिसके लिए किसी को भी पहले से वक़्त का तैयुन (एपाइंटमेंट) करने की ज़रूरत नहीं होती थी और यही काम शीला दिक्षित‌ ने दिल्ली में गुजिश्ता 15 साल तक अंजाम दिया।

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