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केजरीवाल ने नोट बैन के फैसले पर बुलाया आपात सत्र, कहा ग़रीब कड़क चाय की बजाय ज़हर खा रहे हैं

नई दिल्ली : दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने नोट बैन के फैसले पर पैदा हुए विस्फ़ोटक हालात पर चर्चा करने के लिए कल दिल्ली विधानसभा का एक आपात सत्र बुलाया है |

केजरीवाल ने प्रधानमंत्री मोदी की ‘कड़क चाय’ वाली टिप्पणी पर  उन्हें आड़े हाथ लेते हुए कहा कि इसके बजाय गरीब जहर खा रहे हैं।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने जो कुछ कहा है  हालात बिलकुल इसके विपरीत हैं | गरीब बैंकों के बाहर रातें गुजार रहे हैं | वे सो नहीं पा रहे है सिर्फ मोदी जी के मित्र चैन की नींद सो रहे हैं |उन्होंने कहा कि वह लोगों को जरूरत की मूलभूत चीजों को खरीदने के लिए रूपये पाने के लिए मशक्कत करते देख दुखी हैं | उन्होंने कहा कि सरकार जरूरतमंदों के लिए पका पकाया भोजना का बंदोबस्त करने का विकल्प तलाश रही है| इसके लिए  उन्होंने डिवीजनल कमिश्नर को अगले दो तीन दिनों में संभावना तलाशने को कहा है जिससे कि लंगर लगाया जा सके|

मुख्यमंत्री ने दिल्ली के स्वास्थ्य सचिव को भी निर्देश दिया है कि दिल्ली सरकार के अस्पतालों में कोई दिक्कत नहीं हो|
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 15 नवंबर को दिल्ली पहुंचेंगी | केंद्र के इस कदम का मुखर विरोध कर रहीं ममता से भी केजरीवाल के मिलने की संभावना है| उन्होंने कहा कि अगर वे कालाधन के खिलाफ कार्रवाई करना चाहते थे तो उन्हें स्विस बैंक खाताधारकों और जाली नोट छापने वालों को गिरफ्तार करना चाहिए था | केजरीवाल ने कहा कि जो किसान अगले हफ्तों में अपनी फसल काटने वाले हैं उनका क्या होगा ? नकद निकासी की सीमा इतनी कम है इससे कारोबारी अपना कारोबार कैसे जारी रखेंगे ? उन्होंने कहा कि अंबानी, अडानी और शरद पवार मोदी के तीन सबसे अच्छे मित्र हैं |  उन्होंने कालाधन से निपटने के लिए कल (रविवार, 13 नवंबर) पवार का आशीर्वाद लिया। इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या हो सकता है|

केजरीवाल ने कहा कि लोगों की मुश्किलों को देखते हुए दिल्ली सरकार ने सिविल डिफेंस स्वयंसेवियों को तैनात करने का फैसला किया है  | ये पानी और अन्य चीजें बैंकों और एटीएम के बाहर कतार में खड़े लोगों को मुहैया करेंगे | साथ ही, कागजी काम में भी उनकी सहायता करेंगे | 500 और 1000 रुपए के पुराने नोटों को अमान्य करने के फैसले को वापस लेने की अपनी मांग पर अडिग रहते हुए केजरीवाल ने मोदी, वित्त मंत्री अरुण जेटली को आड़े हाथ लिया| उन्होंने कहा कि योजना को अमली जामा पहनाने की किसी ठोस योजना के अभाव में केंद्र ने स्थिति की गंभीरता समझने की क्षमता खो दी है |

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