Thursday , April 27 2017
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केरल उच्च न्यायालय ने कहा, शराब पीना मौलिक अधिकार नहीं

कोच्चि:  केरल उच्च न्यायालय ने पिछली सरकार की शराब नीति को बरकरार रखते हुए बुधवार को इस दलील को खारिज कर दिया कि शराब पीना मौलिक अधिकार है।

सरकार की शराब नीति को चुनौती देने वाली अनूप एमएस की रिट याचिका पर कोर्ट ने यह फैसला सुनाया। न्यायालय ने कहा कि पीना है या नहीं पीना है, यह अनूप की दुविधा है।

उन्होंने पीने को चुना।’’ याचिका की सुनवाई कर रही खंडपीठ ने साथ में यह भी कहा कि अनुप ने दावा किया है कि शराब को प्रतिबंधित करना नागरिकों को दिए गए मौलिक अधिकारों का हनन है। न्यायालय ने दिए गए अपने आदेश में यह भी कहा है कि ऐसा है क्या? हमारा उत्तर है- नहीं।

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