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केरल : कैसे 700 मजदूरों ने सत्तर दिन में मृतप्राय नदी को कर दिया जिन्दा

केरल में 700 मजदूरों ने सत्तर दिनों तक काम कर एक मृत पड़ी नदी को जिन्दा कर दिया। केरल की पंपा और अचनकोविल नदियों की उपधारा से बनी उपनदी कुट्टमपरूर पिछले 10 साल से मृतप्राय थी। मनरेगा के तहत ग्राम पंचायत द्वारा सफाई कराने के बाद नदी को नया जीवन मिल गया है।

 

 

 

राजीवन ने अपनी सबसे पसंदीदा नदी पर काफी समय बिताया है। यह नदी दक्षिण केरल के अलापुज़हा जिले में है जिसमें बड़े पैमाने पर अवैध रेत के खनन हुआ और कई निर्माण भी यहाँ हुए जिससे यह मृत हो चुकी थी। यहाँ मछलियों का भी सफाया हो गया था।

 

 

 

70 दिन तक सात सौ मजदूरों ने काम करके नदी को नया जीवन प्रदान किया है। 12 किलोमीटर लंबी नदी को लेकर 55 वर्षीय ड्राइवर राजीवन कहते हैं कि मैंने कभी नहीं सोचा था कि कुट्मपरूर नदी फिर से जिंदा हो जाएगी।

 

 

 
कुट्टमपरूर एक छोटी सहायक नदी है जो पाम्भा और अचंकोइल नदियों को जोड़ता है लेकिन इस क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए महत्वपूर्ण है जहां जल स्रोत अधिक प्रदूषित होते हैं। जब पानी की कमी असहनीय हो गई, हमने नदी को पुनर्जीवित करने का निर्णय लिया।

 

 

 

बुद्धनूर के पंचायत अध्यक्ष पी विसंबंभरा पनीकर ने कहा शुरू में कई ने हमें यह कहकर हतोत्साहित किया कि यह पैसे और ऊर्जा की बरबादी है लेकिन हमने उन्हें सब गलत साबित कर दिया। ग्रामीणों ने फरवरी में खुद को संगठित किया और राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना के तहत काम शुरू किया।

 

 

 

 

राज्य के पीडब्ल्यूडी मंत्री जी सुधाकरन ने पुनर्जीवित नदी पर नाव की सवारी की।
गौरतलब है कि गांव के 25 हजार एकड़ धान के खेत की सिंचाई का ये प्राकृतिक साधन थी। नदी का प्रयोग स्थानीय कारोबारी माल ढुलाई के लिए भी करते थे।
सरकारी रिकॉर्ड में इसकी लंबाई 12 किलोमीटर और चौड़ाई 100 मीटर है।

 

 

 

 

साल 2005 के आसपास से ये नदी सिकुड़ने लगी। बालू माफिया द्वारा अनवरत खनन और कूड़े के पटाव का सितम नदी सह नहीं पा रही थी। नदी की चौड़ाई सिकुड़कर 10-15 मीटर रह गई थी। आखिरकार जनवरी 2017 में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत नदी की सफाई का काम शुरू हुआ।

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