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केरल में एक नदी को गांव के 700 लोगों ने 70 दिनों में किया साफ

केरल की एक नदी पुनर्जीवन और पुनरुद्धार के बाद पूरे देश ही नहीं बल्कि दुनिया के सामने एक मिसाल बन गई है। मिसाल उस जज्बे की जिसके सामने बड़ी से बड़ी बाधा खुद पानी भरती है। मिसाल उस इच्छा शक्ति की जिसे अगर इंसान ठान ले तो क्या कुछ नहीं कर सकता है।

जी हां, कभी मृतप्राय हो चुकी केरल की कुत्तेमपेरूर नदी अब अविरल बह रही है। 10 साल से प्रदूषण की मार की वजह से करीब-करीब मर चुकी इस नदी में अब जीवन आ गया है। नदी फिर से जी उठी है और वो भी सिर्फ 70 दिन में।

यह कोई सपना नहीं बल्कि हकीकत है जिसे केरल में स्थानीय लोगों की इच्छाशक्ति ने साकार किया है। केरल की प्रमुख नदियों पंपा और अचनकोविल नदी की सहायक नदी कुत्तेमपेरुर को 700 मजदूरों ने 70 दिन में साफ कर जीने के लायक बना दिया।

वैसे पर्यावरणविद तो हमेशा से ही मानते हैं कि किसी भी नदी या जलाशय को पुनर्जीवन दिया जा सकता है चाहे प्रदूषण से वह कितना भी प्रभावित हो या फिर मृतप्राय हो चुका हो।

ऐसे में कुत्तेमपेरुर की सफाई के काम ने न केवल इतिहास रच दिया है बल्कि प्रदूषण की मार झेल रही देश की अन्य नदियों जैसे गंगा और यमुना की सफाई के लिए भी एक मिसाल पेश की है।

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