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केरल: मेडिकल कॉलेज ने लड़कियों के जींस पहनने पर लगाया प्रतिबंध

तिरुवनंतपुरम: केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में एक सरकारी मेडिकल कॉलेज ने छात्राओं से कहा है कि वह जींस, लेगिंग्स या ‘शोर करने वाले आभूषण’ पहनकर न आएं. गुरुवार को जारी किए गए सर्कुलर में कॉलेज के उप-प्रधानाचार्य ने एमबीबीएस कोर्स के सिलसिले में कुछ नियम बताए हैं, ताकि अटेंडेंस और फाइनल इंटर्नल मार्क्सु सुनिश्चित किए जा सकें.

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जनसत्ता के अनुसार, कॉलेज ऑथोरिटी ने सर्कुलर जारी किया है. इस सर्कुलर में लड़के-लड़कियों, दोनों से फार्मली ड्रेस पहनने और ‘क्याक करें’ और ‘क्या न करें’ की लिस्टर दी गई है. जहां लड़कों को ‘साफ-सुथरे कपड़े और फॉर्मल ड्रेस व जूते’ पहनने को कहा है. वहीं छात्राओं के फार्मल ड्रेस में ‘चूड़ीदार या साड़ी’ का जिक्र किया गया है, और उनके बाल ‘बंधे हुए’ होने चाहिए. सर्कुलर में लड़कियों को ‘जींस, लेगिंग्सं या शोर करने वाले आभूषण’ पहनने से रोका गया है. इसी साल, कोझीकोड़ के एक कॉलेज ने कैंपस में लड़कियों के जींस पहनने पर प्रतिबंध लगाया था. मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों में पढ़ने वाली लड़कियों ने शिकायत की है कि साड़ी पहनने पर उन्हें काम करने में दिक्कयत होती है, साथ ही दुपट्टे का ध्याडन रखना भी मुश्किल होता है.
इससे पहले, 17 अक्टूेबर को कोझिकोड़ के एक सलफी आलिम ने मुस्लिम अभिभावकों को नसीहत दी थी कि अपने बच्चों को मुख्यधारा के स्कूलों में नहीं भेजें. उनहोंने यह भी कहा कि मुख्यधारा के स्कूलों में पढ़ने से मुस्लिम बच्चे इस्लाम और अल्लाह से दूर हो जाते हैं और बेदीनी आजाती है, और मुस्लिम अभिभावकों से बच्चों को अपने घर में इस्लामिक तौर तरीकों की शिक्षा देने की भी सलाह दी.

वहीं दूसरी तरफ, 19 अक्टूनबर को केरल के एक स्कूकल ने नियम जारी कर कहा कि बच्चों को टीचरों और सीनियर अथॉरिटीज को हाथ जोड़कर हरि ओम (Hari Om) कहकर नमस्कार करना होगा.

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