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केरोसिन : हर माह नौ करोड़ की हेराफेरी

हुकूमत घरेलू सारफीन के नाम पर केरोसिन मंगाती है, लेकिन उसे सही तरीके से नहीं देती। शहरी इलाकों में फी खानदान फी महिना तीन लीटर और देही इलाकों में चार लीटर केरोसिन देने की तजवीज है, लेकिन सच्चई यह है कि इसका अमल नहीं होता। दूसरी तरफ

हुकूमत घरेलू सारफीन के नाम पर केरोसिन मंगाती है, लेकिन उसे सही तरीके से नहीं देती। शहरी इलाकों में फी खानदान फी महिना तीन लीटर और देही इलाकों में चार लीटर केरोसिन देने की तजवीज है, लेकिन सच्चई यह है कि इसका अमल नहीं होता। दूसरी तरफ ऐसे सारफीन भी हैं, जो केरोसिन नहीं लेते, लेकिन इनके लिए अलोटमेंट केरोसिन की खपत दिखायी जाती है। गुजिशता 13 सालों से मर्कज़ रियासती हुकूमत के लिए हर माह तकरीबन 22500 किलो लीटर केरोसिन एलोट करता रहा है। एक किलो लीटर में एक हजार लीटर होता है। इस तरह हर माह तकरीबन 2.25 करोड़ लीटर केरोसिन मिलता है। केरोसिन तक़सीम मामले में होने वाली तमाम तरह की गड़बड़ी के बारे मेन रियासती हुकूमत और इसके अफसरों को सब कुछ पता है, लेकिन पूरे मामले में सिस्टम ने चुप्पी साध रखी है। इसी कमाई से पूरा फूड सप्लाय महकमा फलता फूलता है। केरोसिन में बड़ी धांधली के मद्देनजर कुछ माह पहले रांची आयी पार्लियामनी कमेटी ने भी तेल कंपनियों से साख बचाने की कार्रवाई का तफ़सीलात मांगा था। केरोसिन में गड़बड़ी के मामले साल 2005 में गिरिडीह में, 2011 में धनबाद में तथा 2012 में खूंटी में दर्ज किये गये थे। धनबाद में तो जांच करने पहुंचे एक ओहदेदार को जिंदा जलाने की कोशिश तक की गयी थी।

गड़बड़ी कैसी-कैसी

रियासत को हर माह 2.25 करोड़ लीटर केरोसिन अलोटमेंट होता है। दो सौ लीटर फी ड्रम के हिसाब से कुल 112500 ड्रम में इस तेल का कारोबार होता है। इधर, पीडीएस दुकानदार को केरोसिन के हर ड्रम में औसतन 10 लीटर तक कम केरोसिन मिलता है। इस तरह तकरीबन 11.25 लाख लीटर केरोसिन पहले मरहले मे ही खुले बाजार में ब्लैक हो रहा है। खुले बाजार में इसकी कीमत 3.37 करोड़ होती है। लातेहार और कुछ दीगर जिले में फी ड्रम 20 लीटर तक केरोसिन कम मिलने की बात सभी जानते हैं। उधर, 28 रुपये फी ड्रम कमीशन पानेवाला पीडीएस दुकानदार इसकी भरपाई कार्ड रखने वालों को तेल में कटौती कर करता है।

हर माह नौ करोड़ की कमाई

केरोसिन से होने वाली कमाई ज़ाती महकमा अफसर भी कुबूल करते हैं। एक मार्केटिंग ऑफिसर (एमओ) ने खुद कहा कि हमलोग केरोसिन पर जिंदा है। ज़राये के मुताबिक हर माह तकरीबन 60 लाख लीटर से कम केरोसिन की कालाबाजारी नहीं होती है। पीडीएस में केरोसिन जहां 14-15 रु लीटर मिलता है, वहीं, खुले बाजार में इसकी कीमत लगभग 30 रुपये फी लीटर है। इस तरह एक करोड़ लीटर तेल से मिलने वाली इजाफ़ी रकम तकरीबन नौ करोड़ रुपये होगी।

एपीएल का 60 फीसद तेल ब्लैक

रियासत के टोटल 19.62 लाख एपीएल कार्ड होल्डरों के नाम से भी केरोसिन का एलोट होता है, लेकिन सच्चई यह है कि तकरीबन 60 फीसद एपीएल (हरा) कार्ड होल्डर पीडीएस की दुकान से केरोसिन नहीं लेते। यह सारा केरोसिन ब्लैक में चला जाता है। फूड सप्लाय महकमा बाजार-हाट में तक़सीम के नाम पर चार-छह सौ से हजार लीटर तक केरोसिन का अलोटमेंट करता है। पर शायद ही किसी ने कहीं ऐसा होते देखा हो। बाजार-हाट में तक़सीम के नाम पर यह तेल कहीं और जा रहा है।

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