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कैंसर पीड़ितों को दोहरी मार, बीमारी से ज्यादा बढ़ रहा महँगी दवाइयों का दर्द

नई दिल्ली: देश आगे बढ़ रहा है और इसके साथ-साथ बहुत सी चीज़ें तरक्की कर रही हैं। जैसे की देश में कैंसर पीड़ित लोगों को इलाज करवाने की दिक्कतों में तरक्की हो रही है।  कैंसर की बीमारी मरीज को जितना दर्द देती है उससे कहीं ज्यादा दर्द उसका महंगा इलाज देता है। हमारी सरकार कहती है कि कैंसर पीड़ितों के लिए कंट्रोल रेट पर दवाइयां मुहैया करवाते हैं लेकिन असल में हकीकत कुछ और ही है।

आज भी कैंसर की दवाएं दो से तीन गुने दाम पर बाजार में बिक रही हैं। जहाँ  सामान्य दवाओं में होल सेलर को 7 से 10 फीसदी और रीटेल दुकानदार को 15 से 20 फीसदी का मुनाफा होता है, लेकिन कैंसर की दवाएं रीटेल में दोगुने-तिगुने मुनाफे के साथ लोगों को बेची जा रही हैं। कैंसर के इलाज में और कीमोथैरेपी के लिए इस्तेमाल होने वाली दवाई पहले 6500 रुपए में मिलती थी।

लेकिन ड्रग प्राइज कंट्रोल आर्डर आने के बाद इस रेट कम करके  5100 कर दिया गया। इस दवा की होलसेल कीमत 2500 से 3000 के बीच है। लेकिन कुछ मेडिकल स्टोर संचालक इसे 3500 रुपए में और कुछ तो 5100 रुपए में ही मरीजों को बेच रहे हैं।

गौरतलब है कि जनता के लिए जरूरी दवाईयों का रेट कंट्रोल में रखने के लिए केंद्र सरकार ने ड्रग प्राइज कंट्रोल आर्डर बनाया है जिसमें 860 दवाएं रखी गई हैं । इस मामले में  रिटायर्ड ड्रग इंस्पेक्टर डीएम चिंचोलकर का कहना है कि सरकार ने दवाईयों को सस्ता करने में जो फार्मूला बनाया है वह सही नहीं है। कैंसर की दवाएं पहले से ही महंगी हैं और उनका औसत ज्यादा आता है। इसी कारण रेट कंट्रोल में आने के बाद भी दवाएं सस्ती नहीं हैं।

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