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कैश पर लगाम लगने से रियल स्टेट में करीब 30% का झटका, रजिस्‍ट्रियों में करीब 60% तक की गिरावट दर्ज

दिल्‍ली : पहले से ही मंदी के शिकार रियल एस्‍टेट कारोबार को नोटबंदी ने और चौपट कर दिया है। कैश पर लगाम लगने से आपकी प्रॉपर्टी के दाम में करीब 30 फीसदी का फटका लग चुका है। देश के ज्‍यादातर हिस्‍सों में रजिस्‍ट्रियां कम हो गई हैं। जो बिल्‍डिंगें तैयार हैं उन्‍हें ग्राहकों का इंतजार है। गोवा में पीएम के भाषण के बाद से तो प्रॉपर्टी बाजार और डरा हुआ है, क्‍योंकि उसमें मोदी ने और सख्‍त कदम उठाने के संकेत दिए थे। हालांकि जानकार बता रहे हैं प्रॉपर्टी के रेट में इससे अधिक गिरावट की संभावना नहीं है, इसलिए घर खरीदने वालों के लिए यह अच्‍छा मौका है।

रजिस्‍ट्रियों में औसतन 60 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई है। दिल्‍ली, फरीदाबाद, गुड़गांव गाजियाबाद और रांची में भी भारी गिरावट देखने को मिली है। रियल एस्‍टेट कंसल्‍टेंट जेएलएल में रेजीडेंशियल सर्विसेज के सीईओ अशविंदर राज सिंह ने मनीकंट्रोल को बताया कि लग्‍जरी घरों के दाम में 25 से 30 फीसदी गिरावट की संभावना है। नेशनल रियल एस्‍टेट डेवलपमेंट काउंसिल (नरेडको) के महानिदेशक ब्रिगेडियर रिटायर्ड आरआर सिंह कहते हैं कि अब प्रॉपर्टी में निवेश कर सौ से दो सौ बनाने का खेल खत्‍म हो गया है। सिंह के मुताबिक आज की स्‍थिति में आप प्रॉपर्टी में पैसा लगाकर ब्‍लैक मनी को व्‍हाइट मनी में नहीं बदल सकते, क्‍योंकि सरकार ने हर ओर से कैश पर लगाम लगाने का इंतजाम कर दिया है। अब निवेशक नहीं, वास्‍तविक खरीदार ही घर की बुकिंग करेगा। नरेडको के मुताबिक दिल्ली-एनसीआर में ही करीब दो लाख घरों को खरीदार नहीं मिल रहे हैं। बिल्‍डरों का कहना है कि पिछले आठ-दस दिन में तो ग्राहक आए ही नहीं हैं।

असंगठित क्षेत्र में होने वाली लैंड डील में 10 से 50 फीसदी तक कैश कंपोनेंट रहता है, लेकिन अब सारा काम चेक और ऑनलाइन पेमेंट से होना है इसलिए कीमतें लगभग 30 फीसदी तक गिर गई हैं। बात बिहार की राजधानी पटना की करें तो यहां करीब 200 रिहायशी और कॅमर्शियल प्रोजेक्ट निर्माणाधीन हैं। बिल्डरों का कहना है कि निर्माण ठप हो गया है। ग्राहक भी वेट एंड वॉच की स्थिति में हैं। पटना के प्रॉपर्टी कारोबारी नेमीचंद चौधरी का कहना है कि नोटबंदी ने रियल्टी सेक्टर की कमर तोड़ दी है। रजिस्ट्री में पुराने नोट नहीं चलने से ग्राहक परेशान हैं। पिछले दस दिन से एक भी रजिस्ट्री नहीं हुई है। इनवेस्टर तो दूर असली खरीददार भी कीमतें कम होने की उम्मीद से सौदा नहीं कर रहे हैं। हालांकि, रहेजा डेवलपर के प्रमुख नवीन रहेजा का मानना है कि प्राइमरी सेक्‍टर में फ्लैट की सेल बढ़ेगी। संगठित क्षेत्र में आने वाले और बड़े डेवलपर नोटबंदी से प्रभावित नहीं होंगे। सेकेंडरी (रिसेल प्रॉपर्टी) मार्केट पर इसका प्रभाव जरूर पड़ेगा।

नोटबंदी की वजह से उत्‍तर प्रदेश के राजस्व को भी भारी झटका लगा है। जहां पहले करीब 4 से 6 करोड़ का राजस्व प्राप्त हो रहा था, वह अब घटकर 60 लाख या इससे भी कम हो गया है। एआईजी एसके त्रिपाठी ने बताया कि नोटबंदी से पहले प्रतिदिन 500-600 रजिस्ट्री होती थी, अब इसकी संख्या घटकर 50 के नीचे रह गई है। उन्होंने बताया कि पुराने नोट न चलने की वजह से यह गिरावट है, जिसकी वजह से सरकारी खजाने में काफी कमी आई है।

पटना के डिस्ट्रिक सब-रजिस्ट्रार (जिला अवर निबंधक) प्रशांत कुमार ने प्रदेश 18 से बात करते हुए बताया कि पटना में सालाना लगभग 12 हजार जमीन और प्लैट की रजिस्ट्री होती है और फिलहाल असर पड़ता नहीं दिख रहा है। इसके पीछे मुख्य कारण यह है कि यहां रजिस्ट्री का प्रोसेस चेक से होता है। रजिस्‍ट्री कम होने से राजस्‍थान सरकार को रोजाना 10 करोड़ से ज्यादा के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है। नवरात्रि और दिवाली के सीजन में जहां सब रजिस्ट्रार दफ्तरों में रोजाना करीब 450 से 500 रजिस्ट्री हो रही थीं वहीं नोटबंदी के पहले सप्ताह में एक भी नहीं हुई।

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