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`कोई मज़हब तशद्दुद और नफ़रत की तालीम नहीं देता’

मदीना एजूकेशन सोसाइटी , भारत एकता मंच , सादात एजूकेशन एंड वेल्फ़ेर सोसाइटी के ज़ेर एहतिमाम एक फ़िक्र अंगेज़ सेम्पोज़ेम `मुख़्तलिफ़ मज़ाहिब में अमन और रवादारी का पयाम' के उनवान पर‌ मदीना एजूकेशन सेंटर नामपली में मुनाक़िद हुआ ।

मदीना एजूकेशन सोसाइटी , भारत एकता मंच , सादात एजूकेशन एंड वेल्फ़ेर सोसाइटी के ज़ेर एहतिमाम एक फ़िक्र अंगेज़ सेम्पोज़ेम `मुख़्तलिफ़ मज़ाहिब में अमन और रवादारी का पयाम’ के उनवान पर‌ मदीना एजूकेशन सेंटर नामपली में मुनाक़िद हुआ ।

के एम आरिफ़ुद्दीन ने हाज़िरीन का ख़ैर मुक़द्दम किया । जस्टिस वामन राव‌ ने अपने सदारती ख़िताब में कहा कि आज समाज में अमन-ओ-इत्तिहाद को फ़रोग़ देना सब की ज़िम्मेदारी है ।

आजकल मज़हब के नाम पर नफ़रत फैलाने का तरीका शिद्दत पा रहा है और एक दूसरे में बदगुमानियां फैलाई जा रही है इस को दोर् करने के लिए आपस में बातचेत की शदीद ज़रूरत है ।

जस्टिस वाणी भास्कर राव‌ साबिक़ चीफ जस्टिस कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा कि अवाम में तामीरी फ़िक्र पैदा करना और अमन-ओ-इत्तिहाद को फ़रोग़ देना मज़हबी क़ाइदीन की ज़िम्मेदारी है ।

उन्होँने कहा कि तमाम मज़ाहिब की तालीमात में अमन-ओ-रवादारी का पयाम शामिल है । उठावें सदी में राजाराम मोहन राए ने अवाम में असरी तालीम के फ़रोग़ के लिये काम किया और सर सय्यद ने भी मुस्लमानों में असरी उलूम को आम करने तहरीक चलाई।

फैज़ान मुस्तफ़ा वाइस चांसलर नल्सार यूनीवर्सिटी आफ़ लाने अपने दानशोराना ख़िताब में कहा कि मुलक के दस्तूर की ये ख़ूबी है कि वो सैकूलर असास का हासिल है । लेकिन बाज़ अनासिर अपने फैदे के लिये मज़हब का इस्तिहसाल करते हैं और कम तालीमयाफ्ता नौजवान इस के शिकार होजाते हैं और मुआशरह में इंतिशार फैलता है ।

स्लाम ने इंतिक़ाम-ओ-बदला लेने से रोका है और माफ़ी की तालीम देता है । उस की वाज़िह मिसाल फ़तह मक्का है जिस में अकाए दोजहां(पीस बी अपॉन हिम) ने अपने बदतरीन दुश्मनों को माफ़ फ़रमाया और सुलह हुदैबिया में मुस्तक़बिल के अज़ीम मुफ़ादात के पेश नज़र कमतर मौक़िफ़ रखते हुए मुफ़ाहमत फ़रमाई ।

आप(पीस बी अपॉन हिम) का ये अस्वा ए हसना मुस्लमानों के लिये सबक़ है । श्रीमती नेता राम कृष्णा एडवोकेट सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारा मुलक महतलिफ़ मज़ाहिब और तहज़ीबों का गुलदस्ता है । हमें एक दूसरे को समझने के लिये मज़हबी तालीमात को समझना चाहीए ।

दानिश्वर हज़रात को इस काम के लिये अहम रोल अदा करना चाहीए । मौलाना सय्यद क़बूल पाशाह कादरी शतारी मोतमिद मजलिस उलमाए दक्कन ने कहा कि औलिया अल्लाह ने हमेशा इंसानियत को मुक़द्दम रखा जिस के सबब आज भी इस के आस्ताने क़ौमी यकजहती के मराकज़ हैं । माज़ी में जो जंगें हुई वो हसूल-ए-इक्तदार के लिये थीं उन का मज़हब से कोई ताल्लुक़ नहीं था लेकिन अफ़सोस के तारीख को मसख़ किया गया ।

मुहतरमा करईस लौरंस ( एमएल ए ) ने कहा कि हमारा मुआशरा तकसेरी मुआशरा है हम को एक दूसरे की ख़ुशी और ग़म में हिस्सा लेना चाहीए जिस से आपसी बिरादराना ताल्लुक़ात अछे होंगे और नफ़रत और बदगुमानी ख़त्म होगी ।

डाक्टर श्रीमती रमेन्द्र कौर ने कहा कि बाबा गिर विनाइंग देव महाराज ने हर इंसान को इन्फ़िरादी स्लाह और स्लाह की तालीम दी और मनश्शियात के इस्तिमाल से रोका क्योंके जब तक किसी शख़्स का किरदार बेहतर नहीं होगा वो समाज में बेहतरी नहीं लासकता ।

मुहतरमा ज्योति किरण एडवोकेट मुअज़्ज़िज़ रुकन तेलंगाना एल्डर्स फ़ोर्म ने कहा कि सैकूलर निज़ाम सियासत के सबब सब को इज़हार ख़्याल की आज़ादी है लेकिन बाअज़ गोशों से वोट बैंक की सियासत के सबब इंतिशार फैलाया जाता है जिस को हम आपसी इत्तिहाद के ज़रीया मुक़ाबला करसकते हैं ।

मेजर सय्यद ग़ौस मुही उद्दीन कादरी जनरल सेक्रेटरी एकता मंच ने कहा कि मज़हब का इस्तिहसाल आम होता जा रहा है बाज़ अक़ल्लीयतों में क़ुव्वत बरदाशत ज़्यादा होती है लेकिन उन्हें वजूद को महफ़ूज़ रखने की फ़िक्र लाहक़ हुई है ।

इस मौके पर मौलाना सय्यद सय्यद कादरी ने आलमी अमन और बेन मज़हबी रवादारी के फ़रोग़ के लिये दुआ की। इब्तिदा में साबिक़ वज़ीर ए आज़म आई के गुजराल साहिब के इंतिक़ाल पर दो मिनट का सोग खड़े हो कर किया गया ।

मुहम्मद अलीउद्दीन कादरी आर्गनाईज़र सेम्पोज़ेम ने निज़ामत के फ़राइज़ अंजाम दिए । भास्कर बेनी ऐडवोकेट ने आख़िर में हाज़रीन का शुक्रिया अदा किया ।

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