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कोर्ट से बाइज़्ज़त बरी होने वाले मुस्लिम युवकों के लिए उठी मुआवज़े की मांग

गुलबर्गा: कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धा रमैया, वित्त मंत्री के रूप में 15 मार्च को अपने राजनीतिक कैरियर का 12 वां बजट पेश करने जा रहे हैं। ऐसे में अल्पसंख्यक समुदाय भी बजट पर निगाहें केंद्रित किए हुए है। जहां अल्पसंख्यक, सरकार से शिक्षा विभाग में विशेष आरक्षण की मांग कर रहा है, वहीं अदालतों से निर्दोष करार दिए जाने वाले मुस्लिम युवकों के पुनर्वास के लिए विशेष पैकेज की भी सरकार से मांग की जा रही है।

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देश के अन्य मुसलमानों की तरह कर्नाटक के मुसलमानों की समस्याएं भी शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा, उर्दू, और आरक्षण के आसपास ही घूमते हैं। बुद्धिजीवियों ने मुख्यमंत्री से अल्पसंख्यकों के लिए शैक्षिक प्रोत्साहन की मांग की है । कांग्रेस ने 2013 में चुनाव घोषणापत्र में मुसलमानों को लुभाने के लिए कई एक वादे किए थे। कुछ तो पूरे हुए हैं और कुछ बाकी हैं। ऐसे में बजट से पहले बुद्धिजीवी कांग्रेस को पुराने वादे याद दिला रहे हैं।
मुख्यमंत्री सिद्ध रमैया द्वारा पिछले बजट में भी कई कईघोषणाएं की गयी थी, जो कि एक साल पूरा होने के बावजूद भी पूरे नहीं हुए हैं। बुद्धिजीवियों ने पिछले बजट के घोषणाओं पर भी सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है।
प्रदेश 18 के अनुसार, र्नाटक में अल्पसंख्यकों की 16 प्रतिशत आबादी है जिस में मुसलमानों के अलावा ईसाई, सिख, जैन और पारसी भी शामिल हैं। पिछले बजट में मुख्यमंत्री ने 16 प्रतिशत अल्पसंख्यक आबादी के लिए 1375 करोड़ रुपये आवंटित किए थे। इस बार आवंटन 1500 करोड़ से अधिक रहने की संभावना है।

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