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कोल स्कैम मामले में सीबीआई के पूर्व प्रमुख के खिलाफ़ जांच के आदेश

नई दिल्ली। कोल स्कैम मामले की सुनवाई करते हुए सोमवार को कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया। कोर्ट ने सीबीआई के पूर्व चीफ रंजीत सिन्हा के खिलाफ जांच के ऑर्डर दिए। सिन्हा पर आरोप है कि उन्होंने आरोपियों से मुलाक़ात कर जांच प्रभावित करने की कोशिश की थी। सुप्रीम कोर्ट ने सिन्हा के खिलाफ जांच के लिए एसआईटी का भी गठन कर दिया है। फैसला सुनाते हुए जस्टिस एमबी लोकुर की बेंच ने सीबीआई डायरेक्टर इसकी अगुआई करेंगे।

इससे पहले मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई जांच समिति ने पाया कि सिन्हा द्वारा जांच को प्रभावित करने की कोशिश की गई। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 12 जुलाई को इस केस में अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कोर्ट से कहा था कि पूर्व सीबीआई विशेष निदेशक एमएल शर्मा की अगुआई वाली जांच समिति ने पाया कि इस घोटाले के हाई प्रोफाइल आरोपियों ने सिन्हा से मुलाकात की थी। इससे पहली नजर में यह पता चलता है कि घोटाले की जांच को प्रभावित करने का प्रयास किया गया था।

रिपोर्ट में जांच समिति ने यह भी पाया कि सिन्हा के आवास पर आगंतुकों की डायरी असली है। हालांकि रोहतगी ने कहा था कि इस डायरी में दर्ज किए गए नामों की सच्चाई सुबूत के जरिए केवल कोर्ट ही तय कर सकता है। पिछले साल अगस्त महीने में कोल स्कैम में पहली सजा का एलान हुआ था। सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने दोषी करार रुंगटा ब्रदर्स को 4 साल जेल की सजा और 5-5 लाख का जुर्माना भी ठोंका। इसके अलावा झारखंड इस्पात प्राइवेट लिमिटेड (JIPL) पर भी 25 लाख का जुर्माना लगाया। रुंगटा ब्रदर्स को कोर्ट ने 28 मार्च को दोषी ठहराया था। जिसके बाद उन्हें अरेस्ट कर लिया गया था।

यह मामला 2012 में संप्रग सरकार के दौरान सामने आया था। सीएजी ने मार्च 2012 में अपनी रिपोर्ट में सरकार पर आरोप लगाए कि उसने 2004 से 2009 के दौरान गलत तरीके से कोल ब्लॉक आवंटित किए। इससे सरकार को 1 लाख 86,000 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। कोल ब्लॉक हासिल करने वाली कंपनियों को काफी फायदा हुआ। सीएजी के मुताबिक सरकार ने कई कंपनियों को बिना किसी नीलामी के कोल ब्लॉक आवंटित कर दिए थे।

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