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कोसी कलां के दौरे के लिए अखिलेश और राहुल के पास फ़ुर्सत नहीं

मथुरा ज़िला के क़स्बा कोसी कलां में हुए फ़िर्कावाराना फ़साद ( संप्रायिक दंगो) में 4 मुसलमानों की हलाकत ( मौत) के बाद अब क़स्बा में हालात बतदरीज बहाल हो रहे हैं लेकिन क़स्बा में अब भी कशीदगी बरक़रार है। कर्फ़यू में दिन में बड़ी हद तक नरमी दी ग

मथुरा ज़िला के क़स्बा कोसी कलां में हुए फ़िर्कावाराना फ़साद ( संप्रायिक दंगो) में 4 मुसलमानों की हलाकत ( मौत) के बाद अब क़स्बा में हालात बतदरीज बहाल हो रहे हैं लेकिन क़स्बा में अब भी कशीदगी बरक़रार है। कर्फ़यू में दिन में बड़ी हद तक नरमी दी गई है। ज़िला इंतिज़ामीया ने किसी बाहरी तंज़ीम , लीडरों के क़स्बा में आने पर इमतिना आइद ( प्रतिबंध लगाना) कर दिया है। इंतिज़ामीया ने मौलाना अहमद बुख़ारी को फ़सादज़दा क़स्बा का दौरा करने की इजाज़त नहीं दी।

इन के बाद राष्ट्रीय उल्मा कौंसल के वफ़द ( प्रतिनीधी मंडल) को भी आने से रोक दिया गया। फ़साद के ज़िम्मेदार साबिक़ रियास्ती वज़ीर
(पूर्व राज्य मंत्री) और बी एस पी लीडर लक्ष्मी नारायण और उन के भाई के बिशमोल दीगर (अन्य/ दूसरे) फ़सादीयों को चूँकि अभी तक पुलिस ने नहीं पकड़ा है जिस से ममसलमानों में ज़बरदस्त बेचैनी है।

फ़साद के तक़रीबन एक हफ़्ता बाद भी अब तक वज़ीर-ए-आला अखिलेश यादव ने ना तो फ़सादज़दा इलाक़ा का दौरा किया और ना ही उन्होंने फ़साद से मुतास्सिरा ( प्रभावित) क़स्बा की सूरत-ए-हाल का जायज़ा लेने के लिए अपनी काबीना के किसी वज़ीर को भेजा। और तो और अखिलेश यादव की वज़ारती कौंसल के किसी भी मुस्लिम वज़ीर ( सचिव/ मंत्री) ने अज़खु़द (अपने आप) फ़सादज़दा क़स्बा का दौरा करने की ज़हमत गवारा नहीं की।

जमई तुल उलमा के मौलाना महमूद मदनी ने इस सिलसिला में अखिलेश यादव को मकतूब ( पत्र/ खत) लिखा है। कल हिंद कांग्रेस के जनरल सेक्रेटरी राहुल गांधी और द्विग विजय सिंह जो वक़तन फ़वक़तन यूपी के दौरे पर आते रहते हैं। खासतौर पर राहुल गांधी जो दलितों या किसी दूसरे तबक़ा पर हुए किसी मामूली वाक़िया को सुन कर यूपी का दौरा करते हैं वो अभी तक ना तो कोसी कलां आए हैं।

द्विग विजय सिंह ने फ़िर्क़ा परस्तों और बी एस पी पर तन्क़ीद पर ही इकतिफ़ा किया। अखिलेश यादव हुकूमत ने फ़साद की जांच के लिए किसी कमेटी की तशकील का ऐलान अभी तक नहीं किया। मौलाना अहमद बुख़ारी के दामाद उमर अली ख़ां समाजवादी पार्टी के मेंम्बर ( सदस्य) कौंसल हैं उन्होंने कौंसल में भी इस मुआमला को नहीं उठाया।

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