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क्या अन्ना हजारे पछताएंगे…

अन्ना हजारे और उनके हामीयो ( सहयोगी) ने करीब 16 माह पहले हिंदुस्तान में बदउनवानियो (भ्रष्टाचार) के खिलाफ एक अलख जगाई थी। वर्तमान सिस्टम तथा भ्रष्टाचार से निराश और हताश जनता ने टीम अन्ना की इस गैर सयासी (राजनीतिक) लड़ाई को अपना पूरा सम

अन्ना हजारे और उनके हामीयो ( सहयोगी) ने करीब 16 माह पहले हिंदुस्तान में बदउनवानियो (भ्रष्टाचार) के खिलाफ एक अलख जगाई थी। वर्तमान सिस्टम तथा भ्रष्टाचार से निराश और हताश जनता ने टीम अन्ना की इस गैर सयासी (राजनीतिक) लड़ाई को अपना पूरा समर्थन दिया था।

अन्ना को मिले ताइद से जहां सरकार और अन्य राजनीतिक दल सावधान अवस्था में आ गए वहीं टीम अन्ना के कुछ हामियो ने इस समर्थन को देख ज्यादा यकीन से लबरेज हो गए थे। बस यहीं से ‘महत्वकांक्षाएं’ भी जाग उठीं जिनकी परिणिति गुरुवार को अन्ना हजारे के राजनीतिक विकल्प की ओर तकने से हुई।

तीसरी बार अनशन पर बैठ रहे टीम अन्ना के अरकानो (सदस्यों) को लगातार 9 दिन के बाद भी आवाम का समर्थन नहीं मिल पाया। न ही सरकार ने इस मामले पर कोई रुचि दिखाई।

इसके पहले अन्ना हजारे का मानना था कि अगर वे नगरपालिका का चुनाव भी लड़े तो उनकी जमानत जब्त हो जाएगी। इसके पीछे की वजह बताते हुए अन्ना कहते है कि अभी आवाम में इतनी समझ नहीं है कि वे सही उम्मीद्वार (प्रत्याशी) को वोट दे सकें। लेकिन अब इस मामले पर अन्ना का यू’टर्न ( You Turn) कई सवालों को उठा रहा है।

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