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क्या चीन ने तिब्बत की सीमा सुरक्षा कड़ी करके देना चाहा है भारत को सन्देश?

बीजिंग: चीन ने आतंकवाद और ‘अलगाववाद’ से लड़ने के लिए सीमावर्ती क्षेत्र में सुरक्षा नियमों को कड़ा कर दिया है , राज्य के स्वामित्व वाली “ग्लोबल टाइम्स” ने कहा।

यह कदम चीन की दिसम्बर मे दी गयी चेतावनी के बाद आया है , जहाँ उसने अपने पड़ोसी देश  भारत को यह चेतावनी दी थी की वह एक वरिष्ठ निर्वासित तिब्बती धार्मिक नेता की यात्रा पर उलझने पैदा  करना बंद कर दे।

इन दोनों देशो के बीच १९६२ में युद्ध हो चूका है ।

बीजिंग,  निर्वासित तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा को एक खतरनाक अलगाववादी के रूप में देखता है। नोबेल शांति पुरस्कार विजेता दलाई लामा, कहते हैं की वह सिर्फ अपने देश के लिए वास्तविक स्वायत्तता चाहते हैं । वे चीन के खिलाफ १९५९ में अपने असफल विरोध के बाद वहां से भाग कर भारत आ गए थे ।

“अलगाववाद, घुसपैठ, अवैध प्रवास और आतंकवाद का मुकाबला करने की जरूरत दिन पर दिन बढ़ती जा रही है ,” क्योंकि तिब्बत की अर्थव्यवस्था अब दुनिया के लिए खुल रही है , बा झू, क्षेत्र की सीमा रक्षा पुलिस के उप प्रमुख ने दिसम्बर १४ की घोषणा में कहा जिसके बारे मे आधिकारिक तिब्बत कानूनी अखबार ने सुचना दी।

दक्षिणपंथी लोगो के समूहों का कहना है की चीन ने तिब्बत की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को कुचल दिया है। इन सभी आरोपो से बीजिंग ने यह कह कर इनकार कर दिया की उनके सैनिको ने शांति पूर्वक तरीको से तिब्बत को १९५० में मुक्त कराया है।

तिब्बत के सैनिको ने सीमा की रक्षा के लिए “स्टील ग्रेट वाल” बनायी थी , हिमालय क्षेत्र की कम्युनिस्ट पार्टी के प्रमुख, वू यिंगजिए ने दिसम्बर मे अपने भाषण मे कहा जो मंगलवार को आधिकारिक चीन तिब्बती समाचार एजेंसी की वेबसाइट पर प्रकाशित हुआ।

वू ने राष्ट्रपति जिनपिंग के हवाले से कहा की ” राष्ट्र पर शासन करने के लिए हमे हमारी सीमाओं पर शासन चाहिए; सीमाओ पर शासन के लिए हमे पहले तिब्बत को स्थिर करना होगा ।

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