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क्या दूसरे पत्रकारों से ज़्यादा कीमती है BJP की जी हजूरी में लगे अर्नब और सुधीर की जान?

नई दिल्ली:  टाइम्स नाउ के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी को Y कैटेगरी सिक्योरिटी मिलने की खबरे हर तरफ गरमाई हुई हैं। मोदी सरकार के चाहते अर्नब गोस्वामी से पहले जी न्यूज के संपादक सुधीर चौधरी Y कैटेगरी की सिक्योरिटी की मालकियत हासिल कर चुके हैं। अर्नब ने सुरक्षा को ध्यान में रखते मोदी सरकार ने उनकी शान में चार चाँद लगाते हुए अर्नब की सुरक्षा का सारा भार अपने चौड़े कन्धों पर उठा लिया है।

अब अर्नब पूरा दिन 20 सिक्योरिटी गार्ड्स और दो निजी सुरक्षा अधिकारियों के मजबूत घेरे मे रहेंगे। पहले सुधीर चौधरी, अब अर्नब गोस्वामी और हो सकता है कि अब मोदी सरकार इस लिस्ट में अगला नंबर सुदर्शन न्यूज चैनल के सुरेश चव्हाण्के का लगाएं। पत्रकारों के लिए सरकार की ये चिंता वाजिब तो लगती है लेकिन ये चिंता तब तक आधी-अधूरी है जब तक मोदी अपने चहेतों को छोड़ दुसरे पत्रकारों की सुरक्षा पर भी नजर मारेंगे।

इन दो पत्रकारों का इतना ख़ास ख्याल रखने के पीछे क्या वजह हो सकती है ? क्यों इन दोनों को ही सिक्योरिटी के ज्यादा जरूरत है ? क्या देश के बाकी पत्रकारों को इनसिक्योरिटी की भावना मन में नहीं आती या फिर वह लोग अपना काम निष्पक्ष तरीके से निडर होकर इतनी बखूबी निभा रहे हैं कि उन्हें ऐसी चोचलों में फंसने की जरूरत महसूस नहीं होती।

गौरतलब है कि पत्रकारों को अक्सर विरोधियों के विरोध का शिकार होना पड़ता है जोकि उनकी सोशल मीडिया प्रोफाइल पर अक्सर देखने को मिल जाता है जिनमें शामिल हैं राजदीप सरदेसाई, बरखा दत्त, अभिसार शर्मा, ओम थानवी, दिलीप सी मंडल जैसे पत्रकार। सोशल मीडिया पर ऐसे गुंडो की गुंडागर्दी और अपशब्दो से तंग आकर सीनियर पत्रकार रवीश कुमार काफी समय से सोशल मीडिया से दूर है।

पिछले दिनों ही जनता का रिपोर्टर के फाउंडर और सीनियर पत्रकार रिफत जावेद को ट्विटर पर जान से मारने की धमकी दी गई थी। सोचने वाली बात है कि सरकार इन पत्रकारों को साइबर सिक्योरिटी तक मुहैया नहीं करा रही बाकी तो दूर की बात है। क्या सरकार के लिए इनकी जान के कोई मायने नहीं ? समान नागरिक सहिंता का हवाला दे रही सरकार पत्रकारों को एक नजर से देखना कब शुरू करेगी ? करेगी भी या नहीं क्योंकि खतरा सबकी जान को होता है। सरकार को इनकी सुरक्षा के बारे में भी सोचा चाहिए।

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