Friday , September 22 2017
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क्या देश में दंगे होने का इंतजार कर रही है केंद्र सरकार : सुप्रीम कोर्ट

दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने नोटबंदी से हो रही दिक्कत पर केंद्र सरकार के खिलाफ तल्ख टिप्पणी की। बैकों और एटीएम के बाहर लंबी कतारों को गंभीर मामला बताते हुए कोर्ट ने कहा कि क्या केंद्र सड़कों पर दंगे होने का इंतजार कर रहा है। उसे समस्याओं के समाधान के लिए तुरंत उपाय करने चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने 500 रुपये और 1000 रुपये के नोट बंद करने की अधिसूचना को विभिन्न अदालतों में चुनौती देने वाली याचिकाओं पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि हम लोगों को अपनी समस्याएं कोर्ट में लाने में नहीं रोक सकते हैं। केंद्र ने नोटबैन को चुनौती देने वाले किसी भी मामले पर सिर्फ सुप्रीम कोर्ट को ही विचार करने का आग्रह किया था।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विभिन्न कोर्टों में दायर मामलों को दिल्ली हाईकोर्ट में स्थानांतरित किया जा सकता है। केंद्र इसके लिए स्थानांतरण याचिका दे। कोर्ट ने अटार्नी जनरल से पूछा कि वह बताएं कि समस्या से निपटने के लिए क्या क्या कदम उठाए गए।

पीठ ने कहा, कुछ उपाय करने की जरूरत है। देखिये जनता किस तरह की समस्याओं से रूबरू हो रही है। लोगों को हाईकोर्ट जाना ही पड़ेगा। यदि हम हाईकोर्ट जाने का उनका विकल्प बंद कर दहेंगे तो हमें समस्या की गंभीरता का कैसे पता चलेगा। लोगों के विभिन्न अदालतों में जाने से ही समस्या की गंभीरता का पता चलता है।

पीठ ने यह टिप्पणियां उस वक्त की जब अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि पांच सौ और एक हजार रुपए के नोटों के विमुद्रीकरण को चुनौती देने वाले किसी भी मामले पर सिर्फ देश की शीर्ष अदालत को ही विचार करना चाहिए।

हालांकि, पीठ ने कहा, जनता प्रभावित है । जनता व्यग्र है। जनता को अदालतों में जाने का अधिकार है। समस्यायें हैं और क्या आप (केन्द्र) इसका प्रतिवाद कर सकते हैं। अटार्नी जनरल ने कहा कि इसमें कोई विवाद नहीं है परंतु ये कतारें अब छोटी हो रही हैं। उन्होंने तो यह भी सुझाव दिया कि प्रधान न्यायाधीश भी भोजनावकाश के दौरान बाहर जाकर स्वंय इन कतारों को देख सकते हैं।

मुकुल रोहतगी ने पीठ से कहा, कृप्या भोजनावकाश के दौरान जाइए। इसके साथ ही उन्होंने स्थिति को कथित रूप से बढ़ा चढ़ाकर पेश करने पर एक निजी पक्ष की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल के कथन पर आपत्ति व्यक्त की।

अटार्नी जनरल ने कहा, न्यायालय में यह एक राजनीतिक प्रयास है। मैंने आपकी (सिब्बल) की प्रेस कांफ्रेंस भी देखी है। आप किसी राजनीतिक दल की ओर से नहीं बल्कि एक वकील के लिये पेश हो रहे हैं। आप शीर्ष अदालत को राजनीति का मैदान बना रहे हैं। इससे पहले, मामले की सुनवाई शुरू होते ही पीठ ने केन्द्र से इस मामले में राहत के लिये किये गये उपायों पर सवाल किया और कहा, पिछली सुनवाई पर आपने कहा था कि आने वाले दिनों में जनता को राहत मिलेगी परंतु आपने नोट बदलने की सीमा ही घटाकर दो हजार रुपए कर दी।

अटार्नी जनरल ने कहा, स्टेट बैंक की कार्ड स्वाइप मशीन वाले पेट्रोल पंपों से भी जनता को दो हजार रूपए तक निकालने की अनुमति दी गयी है। हम दैनिक आधार पर स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दो हजार रुपए के नये नोट लाना भी एक मकसद था क्योंकि दो हजार रुपए का एक नोट सौ रूपए के बीस नोट के बराबर है।

इस मौके पर सिब्बल ने हस्तक्षेप करते हुये कहा कि समस्या छपाई की है क्योंकि इन्हें 23 लाख करोड़ रुपए छापने हैं परंतु इनके पास ऐसा करने की क्षमता नहीं है। उन्होंने कहा, पहले ही यह 14 हजार करोड़ रुपए जब्त कर चुके हैं और अभी यह स्पष्ट नहीं है कि किस कानून के तहत ऐसा किया गया है। उन्होंने कहा कि यह गंभीर स्थिति है जहां जनता अपना ही पैसा नहीं निकाल सकती है।

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