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क्या भाजपा ने यूपी में अपनी हार की स्क्रिप्ट खुद ही लिख डाली है ?

लखनऊ: असम में जीत के बाद भाजपा जिस नई ऊर्जा के साथ यूपी चुनाव में उतरी थी अब लग रहा है कि यह ऊर्जा कुछ भाजपा नेताओं और कुछ अन्य परिस्थितियों के मद्देनजर कमजोर पड़ती नजर आ रही है। यूपी जीत का सपना देख रही भाजपा अब बैकफुट पर है और उसके सेनापति को संसद में खड़े होकर माफी मांगना पड़ रहा है।

मालूम हो कि पिछले कुछ दिनों से गुजरात में दलितों के साथ मारपीट का मामला काफी गर्म है। बुधवार को भाजपा दोनों सदनों में इसे लेकर काफी असहाय नजर आई। इस पर भाजपा के यूपी इकाई के उपाध्यक्ष बसपा सुप्रीमो मायावती को लेकर दिया गया बेहद आपत्तिजनक बयान आग में घी डालने वाला रहा। इस बयान के चलते खुद जेटली को राज्यसभा में खेद जताना पड़ा। दूसरी ओर एक लंबे समय से कोई बड़ी दलित अभियान छेड़ने को लेकर असमंजस में चल रहीं मायावती को दलितों को जीवंत और उत्साहित करने के लिए एक मजबूत हथियार मिल गया।

परिणाम आज हमारे सामने है। सालों बाद बसपा एक नई ऊर्जा के साथ यूपी में सड़कों पर उतर आई है। उसके कार्यकर्ता गली गली जाकर अभियान छेड़ने का ऐलान कर रहे हैं। लखनऊ नीले रंग में पिट गया है। जानकार मानते हैं कि भाजपा नेता की यह गलती पार्टी को यूपी में बेहद भारी पड़ने वाली है।

दरअसल यूपी की सत्ता की कुंजी दलित हैं यह भाजपा बखूबी जानती है। इसीलिए अमित शाह पिछले दिनों कुंभ में दलितों के साथ नजर आए। उन्होंने दलितों के यहां जाकर खाना भी खाया और पीएम मोदी एक नहीं कई बार दलितों के मुद्दे पर बोल चुके हैं। याद कीजिए वह पिछले साल अक्टूबर में मुंबई में अंबेडकर की प्रतिमा के शिलान्यास के लिए भी गए थे। यूपी की राह आसान हो इसके लिए कैबिनेट विस्तार में कई दलितों – रामदास अठावले और कृष्णा राज को भी लिया। साथ ही भाजपा के यूपी प्रदेश अध्यक्ष एक ओबीसी को बनाया गया है।

लेकिन भाजपा की ये कोशिशें अब बेकार सी होती नजर आ रही हैं। 2014 के आम चुनाव में जो दलित उनसे छिटक कर भाजपा की झोली में चला गया है वह अब वापस अपने पुराने घर लौटता सा नजर आ रहा है। माया को लोकसभा चुनाव में एक भी सीट नहीं मिली थी। यह दर्द उनके लिए इसलिए बेहद भारी था क्योंकि यूपी में उनका मजबूत दलित वोट बैंक माना जाता रहा है। चुनावी शतरंज में भाजपा की यह गलती उसे कितना नुकसान पहुंचाएगी यह तो आने वाला समय ही बताएगा लेकिन माया को इसका एक बड़ा फायदा तो निश्चित रूप से मिल ही चुका है।

Afsar Ahmed, IBN Khabar

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