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क्या 50 पैसे का सिक्का भी गुज़रे ज़माने की बात बन जाएगा?

(मुहम्मद जसीम उद्दीन निज़ामी) इस में कोई दो राय नहीं कि पचास पैसे के सिक्के का चलन क़ानूनी तौर पर अब भी जायज़ है, लेकिन आम दुकानदार,सब्ज़ी फ़रोश ,मैडीकल स्टोर्स ,बस कंडक्टर्स, यहां तक के भिकारी भी जिस तरह पचास पैसे क़ुबूल करने से गुरे

(मुहम्मद जसीम उद्दीन निज़ामी) इस में कोई दो राय नहीं कि पचास पैसे के सिक्के का चलन क़ानूनी तौर पर अब भी जायज़ है, लेकिन आम दुकानदार,सब्ज़ी फ़रोश ,मैडीकल स्टोर्स ,बस कंडक्टर्स, यहां तक के भिकारी भी जिस तरह पचास पैसे क़ुबूल करने से गुरेज़ कर रहे हैं उसे देखते हुए ऐसा लगता है कि 5,10 ,20, और 25 पैसे की तरह अब 50 पैसे का सिक्का भी जल्द ही गुज़रे ज़माने की बात बन कर रह जाऐगा।

ज़राए के मुताबिक़,छोटे दुकानदारों से लेकर ऑटो ड्राईवर्स , बस कंडक्टर्स , मैडीकल स्टोरस और रीटेल स्टोर के मालेकीन और कस्टमर्स तमाम 50 पैसे के सिक्के को लेने से इनकार करदेते हैं, लेकिन अगर क़ानून की बात करें, तो ऐसा लगता है कि वो अनजाने में या फिर अपनी सहूलत के लिए ऐसा कर रहे हैं।

चूँकि जारीया साल ही मार्च में रिज़र्व बैंक आफ़ इंडिया ने नए ख़ुसूसियात के साथ50 पैसे के सिक्के जारी करते हुए ये वाज़ेह करदिया था कि पचास पैसे के सिक्के का चलन बदस्तूर जारी रहेगा। इलावा अज़ीं ममलिकती वज़ीर फ़ैनान्स निम्मो नारायण मीना ने भी इसी दौरान लोक सभा में एक सवाल का तहरीरी जवाब देते हुए इस बात की विज़ाहत करदी थी कि पचास पैसे के सिक्के में लेन देन का चलन क़ानूनी तौर पर जारी है।

उन के मुताबिक़, 50 पैसे के सिक्कूं के इस्तिमाल में मुश्किल से मुताल्लिक़ शिकायात मिली हैं,ये शिकायतें आम अवाम से हासिल हुई हैं जिन्हों ने इल्ज़ाम आइद किया है कि 50 पैसे के सिक्के को क़बूल नहीं किए जा रहे हैं। पचास पैसे के सिक्के लेने से गुरेज़ करने वाले दुकानदार या अफ़राद इस हवाले से कई एक वजूहात बताते हैं,कोई महंगाई के सबब रोज़ बरोज़ उसकी घटती हुई अहमियत बताता है तो दुकानदार सिरे से ही अपने पास पचास पैसे के सिक्के की मौजूदगी से इनकार कर देता है।

बताया जाता है कि शहर के अक्सर मुक़ामात पर मेडिकल स्टोर्स और दीगर रीटेलर्स से खरीदारी के बाद अगर गाहक को 50 पैसे वापिस करना हो तो वो पचास पैसे की अदम मौजूदगी का बहाना करते हुए इसके बदले चार ,आठ आने वाले चॉकलेट या टॉफ़ी उनके हवाले करदेते हैं । इसी तरह पेट्रोल पंप ,या बस कंडेक्टर्स राउंड फीगर का हिसाब बताते हुए पचास पैसे ना ले रहे हैं ना वापिस कर रहे हैं।

चारमीनार के दामन में मौजूद एक फल फ़रोश मुहम्मद महबूब का कहना है कि हुकूमत को ये मालूमात अवामी तौर पर जारी करनी चाहीए कि ये सिकेके अभी बंद नहीं हुए हैं इस के बाद ही दुकानदार और गाहक इन सिक्कों को बिला झिझक लेना शुरू करेंगे। वहीं एक ख़ांगी मुलाज़िम सय्यद रफीक का कहना है कि महंगाई के इस दौर में 50 पैसे में सिर्फ़ बच्चों की कुछ टाफ़ियों के इलावा कुछ नहीं ख़रीदा जा सकता है,क्यों कि बढ़ती महंगाई ने 50 पैसों की क़ीमत को ना के बराबर कर दिया है।

वाज़ेह रहे कि आरबी आई ने 30 जून 2011 को एक नोटिस जारी करते हुए 25 पैसे के सिक्के के चलन को बंद करदिया था ,चूँकि उसकी तय्यारी की लागत उसकी क़दर से ज़्यादा होगई थी,और अब जिस तरह दिन बदिन डालर के मुक़ाबिल रुपये की क़दर में गिरावट दर्ज की जा रही है और जिस तरह महंगाई में ज़बरदस्त इज़ाफ़ा होता जा रहा है , उसे देखते हुए ऐसा लगता है कि जल्द या देर 50 पैसे के सिक्के का चलन भी बंद करदिया जाएगा।

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