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क्रांति से विकास की ओर – अखिलेश की रथ यात्रा के लिए चुनौतियों भरा सफ़र

फैसल फरीद,लखनऊ: समाजवादी पार्टी में सत्ता के लिए चल रही उठा-पटक के बीच, अखिलेश यादव अपनी राजनीतिक पारी के लिटमस परिक्षण के लिए तीन नवम्बर को एक यात्रा पर निकल रहे हैं । छ: सालों में इस यात्रा का नाम क्रांति यात्रा से बदल कर विकास यात्रा हो गया है ।

अखिलेश अपनी यात्रा का पहला चरण रथ में परिवर्तित एक वॉल्वो बस में सवार होकर शुरू करेंगे । इस बस का नाम समाजवादी विकास रथ रखा गया है । 2011 में पहली बार जब उन्होंने ऐसी ही एक बस में यात्रा शुरू की थी तब उसका नाम समाजवादी क्रांति रथ रखा गया था ।

रथयात्रा में अखिलेश को तीन बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा – उनके लिए पहली चुनौती यात्रा में अपने बल पर बड़ी भीड़ इकट्ठा करने की होगी जिससे वे पार्टी में अपने रसूख को स्थापित कर सकें जहाँ उन्हें उनके चचा शिवपाल की मुखालफत का सामना करना पड़ रहा है । दूसरी चुनौती हिंदी बेल्ट की जाति आधारित राजनीति के विपरीत विकास के मुद्दों और अपने द्वारा किये गए कार्यों को आगामी चुनाव में वोटों को बदलना होगी । अखिलेश के लिए तीसरी चुनौती यादव और मुस्लिम समुदाय के उन लोगों का समर्थन प्राप्त करना होगा जो मुलायम सिंह के समर्थक हैं । इसके अलावा उन्हें यह भी सुनिश्चित करना होगा की ब्रांड अखिलेश एक स्वतंत्र पहचान है और वह मुलायम की छाया से बाहर आ चुके हैं ।

एक संशोधित बस को रथ का नाम देकर उससे प्रदेश यात्रा करना समाजवादी पार्टी का पुराना है । 1989 में मुलायम सिंह यादव ने ऐसे ही एक रथ में सवार होकर प्रदेश यात्रा की थी और परिणाम स्वरुप वे उत्तर प्रदेश में जनता दल की सरकार में मुख्यमंत्री बने थे ।

लेकिन अखिलेश के लिए फिलहाल परिस्तिथियाँ वैसी नहीं हैं जैसी 2011-12 में थी । पहले से ही देश यादव परिवार में एक राजनीतिक ड्रामा देख चुका है। परिवार में सत्ता के लिए कोलाहल सार्वजनिक रूप से सामने आ रहा है। अखिलेश को सपा में एक मजबूत स्थिति के लिए पहले परिवार के भीतर ही इस लड़ाई को जीतना होगा।

इन परिस्थितियों में, प्रस्तावित रथ यात्रा भी अखिलेश के भविष्य का फैसला करेगी। इस यात्रा के दौरान भीड़ की मौजूदगी न केवल विपक्षी दलों के बीच बल्कि अपनी पार्टी और परिवार के भीतर अखिलेश की स्थिति  के लिए एक पैमाना होगा। इन परिस्तिथियों को समझते हुए अखिलेश समर्थकों ने जो मुख्यत: युवा हैं उन्होंने यात्रा को सफल बनाने के लिए योजना तैयार की है। पहला चरण में यात्रा मुख्यमंत्री निवास के सामने लामार्ट कॉलेज के मैदान से शुरू होगी और गोमती नगर पार करते हुए उन्नाव में प्रवेश करेगी और कानपुर में पहले चरण अंत होगा । 2011 में अखिलेश ने अपनी यात्रा की शुरुआत विक्रमादित्य मार्ग पर स्थित सपा कार्यालय के सामने से शुरू की थी । तब मुलायम सिंह और शिवपाल दोनों ने हरी झंडी दिखा कर यात्रा को रवाना किया था । शिवपाल ने तब यात्रा के लिए अखिलेश को एक पर्स भी भेंट किया था । यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बार 3 नवम्बर को दोनों फिरसे यात्रा को रवाना करने के लिए मौजूद होंगे या नहीं ।

अखिलेश के लिए यात्रा में भीड़ जुटाना बेहद महत्वपूर्ण होगा । पार्टी ऑफिस के बाहर अखिलेश और शिवपाल के समर्थकों के बीच झड़प से यह तो साफ़ हो चुका है कि दोनों के समर्थकों के बीच ज़मीन पर भी मतभेद हैं । अखिलेश के समर्थकों को यात्रा को सफल बनाने में एड़ी चोटी का जोर लगाना होगा । “हम मौजूदा हालात को समझते हैं। हम कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। सीएम के कारण लोगों से समर्थन अपने आप ही आ रहा है। मुझे विश्वास है कि भीड़ उम्मीद से ज्यादा ही होगी, “सुनील सिंह साजन, विधान परिषद के सदस्य और अखिलेश के करीबी सहयोगी ने कहा। अखिलेश से उनकी निकटता के कारण, शिवपाल ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया है।

यात्रा उन्नाव से होकर गुजरेगी जहाँ यादवों की बड़ी आबादी रहती हैं – जो सपा की मुख्य मत आधार है । अखिलेश को अपने लिए इस आबादी का समर्थन भी प्रदर्शन करना होगा । इस आबादी ने हमेशा मुलायम का बेशर्त समर्थन किया है । यात्रा की सफलता यह भी सुनिश्चित करेगी की यादव अब अखिलेश के साथ है जिसे सपा की मशाल सौंप दी गयी है । 2012 में भी अखिलेश ने समर्थन हासिल करने में कामयाबी पायी थी लेकिन तब मुलायम ने दावा किया था कि जनता ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाने के लिए वोट दिया है परन्तु उन्होंने अखिलेश को मुख्यमंत्री बना दिया ।

उन्नाव पहला बड़ा जिला है जिसे अखिलेश द्वारा कवर किया जाएगा और यह कई चुनौतियों पैदा करेगा। यह जिला साजन का गृह क्षेत्र है , जो अखिलेश के समर्थक हैं और साथ ही यह सपा विधायक उदयराज यादव का गृहनगर भी है जो शिवपाल के खेमे में हैं । लोकसभा सीट पर भाजपा के साक्षी महाराज इस जिले का प्रतिनिधित्व करते है। सपा के अंदरूनी सूत्रों ने जानकारी दी कि अखिलेश का हर दो किलोमीटर की दूरी पर कार्यकर्ताओं द्वारा स्वागत किया जाएगा । अखिलेश के सड़क पर उतरते ही समर्थकों द्वारा रंगों और पटाखों से होली और दिवाली मनाई जाएगी ।

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