Monday , July 24 2017
Home / India / क्रिश्चियन पर्सनल लॉ के तहत तलाक को कानूनी मान्यता नहीं: सुप्रीम कोर्ट

क्रिश्चियन पर्सनल लॉ के तहत तलाक को कानूनी मान्यता नहीं: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि गिरिजाघर न्यायाधिकरण द्वारा किनन ला (क्रिश्चियन पर्सनल ला) के तहत तलाक देना कानूनी रूप से सही नहीं है. कोर्ट ने कहा कि डिवोर्स अधिनियम के बाद ईसाई पर्सनल लॉ के तहत तलाक नहीं हो सकता है.

Facebook पे हमारे पेज को लाइक करने के लिए क्लिक करिये

न्यूज़ 18 के अनुसार, शीर्ष अदालत ने कहा कि ईसाई जोड़ी का तलाक कानूनी तौर पर तभी सही होगा, जब वे भारतीय कानून के तहत लिया गया हो. क्रिश्चियन पर्सनल ला संसद द्वारा बनाए गए कानून की जगह नहीं ले सकता. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने पीआईएल को भी खारिज कर दिया, जिसमें चर्च द्वारा दी गई तलाक के मामले को कानूनी मान्यता दिए जाने की मांग की गई थी.

मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूर की बेंच ने इस मामले में कर्नाटक कैथोलिक एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष सी पाईस की ओर से दाखिल याचिका को खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा कि 1996 में सुप्रीम कोर्ट से जोसेफ बनाम जॉर्ज सेबेस्टियन के मामले में पहले ही फैसला दिया गया है, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि तलाक अधिनियम आने के बाद से पर्सनल ला के तहत शादी खत्म करने का कोई कानूनी औचित्य नहीं है.

बता दें कि आवेदक ने अपनी याचिका में यह भी कहा था कि चर्च द्वारा तलाक को स्वीकार किया जाना चाहिए, क्योंकि यह पर्सनल लॉ के तहत आता है और उसे भारतीय कानून के तहत मान्यता प्राप्त होना चाहिए. उनकी दलील दी थी कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत जिस तरह से तीन तलाक को मंजूरी दी जाती है, उसी तरह उन्हें भी मान्यता मिलनी चाहिए.

उधर केंद्र सरकार ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि कैनन ला, इंडियन क्रिश्चियन मैरिज एक्ट 1872 और तलाक अधिनियम 1869 में प्रभावी नहीं हो सकता. चूंकि शादी समाप्त करने से संबंधित निर्णय लेने का अधिकार केवल कोर्ट को है ऐसे में चर्च न्यायाधिकरण सहित अन्य प्राधिकारी को ऐसा अधिकार नहीं है कि वह शादी को खत्म करने का फरमान जारी करें.

TOPPOPULARRECENT