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क्लास में भी तालेबा महफूज नहीं : ख़वातीन कमीशन

डोरंडा बाजार के बीचोंबीच वाक़ेय सरकारी स्कूल सेठ सीताराम की तालेबा को रोजाना छेड़छाड़ का सामना करना पड़ता है। क्लास में भी लड़कियां महफूज नहीं हैं। खिड़की के बाहर से उन पर फब्तियां कसी जाती हैं। फहस गानों के जरिये उन पर ताने कसे जा

डोरंडा बाजार के बीचोंबीच वाक़ेय सरकारी स्कूल सेठ सीताराम की तालेबा को रोजाना छेड़छाड़ का सामना करना पड़ता है। क्लास में भी लड़कियां महफूज नहीं हैं। खिड़की के बाहर से उन पर फब्तियां कसी जाती हैं। फहस गानों के जरिये उन पर ताने कसे जाते हैं। सब कुछ जान कर भी स्कूल के प्रिन्सिपल और असातिज़ा लाचार हैं। मुखालिफत करने पर छेड़खानी करने वाले आसातिजा को भी धमकी देते हैं। थाना में शिकायत करने के बाद भी मदद नहीं मिली है।
एनजीओ युवा झारखंड और प्रतिज्ञा की तरफ से सनीचर को “विद्यार्थी सरकार संवाद” प्रोग्राम में स्कूल की तालेबाओं ने अपनी परेशानियाँ बतायी। रियासती ख़वातीन कमीशन की सदर महुआ माजी और साबिक़ डिप्टी मेयर अजयनाथ शाहदेव ने तालेबाओं के साथ घूम कर सुरते हाल का जायजा लिया। महुआ माजी ने कहा कि यह काफी संगीन मसला है। बच्चियों की छेड़खानी के सवाल और उन्हें हिफाजत देने को लेकर रियासत के डीजीपी से मिलेंगे। स्कूल की चहारदीवारी की तामीर और पेट्रोलिंग की निज़ाम शुरू कराने की दरख्वास्त किया जाये, ताकि इस पर बिला ताखरी लगाम लग सके।

साबिक़ डिप्टी मेयर अजयनाथ शाहदेव ने कहा यह स्कूल कैंपस के अंदर बच्चियों से छेड़छाड़ होना काफी संगीन मामला है। सेक्रेट्रिएट और थाना के करीब होने के बावजूद इस पर कार्रवाई नहीं होना बदकिस्मती और अफसोशनाक है।

छेड़खानी से तंग एक बच्ची ने छोड़ा स्कूल : स्कूल में आये दिनों हो रही छेड़छाड़ से तंग आकर एक तालेबा ने स्कूल आना छोड़ दिया। स्कूल की असातिज़ा और उसकी साथियों ने बताया कि स्कूल आने के दौरान उसके साथ लड़के छेड़छाड़ करते थे। स्कूल के मैदान में भी उसे परेशान किया जाता था। इससे तंग आकर उसने स्कूल आना छोड़ दिया।

शिकायत करने पर नहीं हुई कार्रवाई : प्रिंसिपल विमला कुमारी ने बताया कि पढ़ाई के दौरान लड़के चहारदीवारी के अंदर घुस जाते हैं। बाइतुल खुला जाने के दौरान छेड़छाड़ की जाती है। मुखालिफत करने पर नौजवान धमकी देते हैं। इसकी शिकायत डोरंडा थाने में की गयी, लेकिन कार्रवाई नहीं की गयी।

लड़कियों ने क्या-क्या बताया
स्कूल के दौरान खुलेआम घूमते रहते हैं लड़के।
कैंपस में खेलते हैं जुआ, करते हैं नशा।
स्कूली बच्चों को भेजते हैं गुटका लाने।
लड़कियों के बाइतुल खुला का दरवाजा और खिड़की तोड़ दिये हैं।
स्कूल की दीवारों पर लिखे गये हैं फहस फब्तियां।
पढ़ती बच्चियों पर खिड़की से फब्तियां कसी जाती हैं।
बाइतुल खुला जाने के दौरान बच्चों के पैंट खोल दिया जाता है।
बच्चों को ड्रेनड्राइट लेने के लिए किया जाता है कोशिश ।

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