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क्‍या सरबजीत की ‘मौत’ छुपा रहा है पाकिस्‍तान? हिन्दुस्तान‌ ने फिर की रिहाई की अपील

नई दिल्ली.

नई दिल्ली. पाकिस्तान के हस्पताल में ज़िंदगी और मौत के बीच‌ झूल रहे हिन्दुस्तानी क़ैदी सरबजीत सिंह को ईलाज के लिए बैरून-ए-मुल्क भेजा जाएगा। हिन्दूस्तान‌ में सरबजीत की सलामती के लिए दुआ और साथ ही उसे ईलाज के लिए बैरून-ए-मुल्क भेजने की भी मांग की जा रही है। लेकिन पाकिस्तान ने ये मांग खारिज‌ कर दी है।

सरबजीत का ईलाज पाकिस्तान के बजाय हिन्दुस्तान‌ में हो, ये मांग‌ काफ़ी तेज़ हो रही है. उसे देखते हुए ये फ़ैसला करने के लिए कि इनका ईलाज पाकिस्तान में ही होगा या बेहतर ईलाज के लिए बैरून-ए-मुल्क भेजा जाये, चार डाक्टरों का पैनल बना दिया गया. इस पैनल का कहना है कि सरबजीत का ईलाज पाकिस्तान में ही किया जाना चाहीए।

पाकिस्तान के जियो न्यूज चैनल के मुताबिक़ हुकूमत ने महमूद शौकत को इस पैनल का सरबराह बनाया था। पैनल ने पीर‌ को सरबजीत के अब तक किए गए तमाम तहक़ीक़ात और उनकी चोटों का तजुर्बा किया लेकिन उन्होंने सरबजीत की हालत पर कुछ नहीं कहा।

हिन्दूस्तान की हुकूमत ने पाकिस्तान से सरबजीत को इंसानी बुनियाद पर रिहा करने की अपील की है। वज़ारत-ए-ख़ारजा का कहना है कि हुकूमत सरबजीत के ख़ानदान के साथ है। हिन्दुस्तान‌ ने सरबजीत पर हुए हमले की भी जांच की मांग की है और पाकिस्तान की जेलों में बंद दूसरे हिन्दुस्तानी क़ैदीयों की हिफ़ाज़त भी यक़ीनी की जाये।

सरबजीत की हालत में अब तक किसी बेहतरी की ख़बर नहीं है। सरबजीत के सर पर ईंटों और गले पर तेज़ हथियार के निशानात हैं और वो उस वक़्त भी डीप कोमा में हैं। सरबजीत को उस वक़्त भी सख़्त पहरे में रखा गया है और उनके ख़ानदान वालों को भी दूर से ही उन्हें देखने की इजाज़त दी गई है। सरबजीत के बारे में सरकारी तौर पर हकूमत-ए-पाकिस्तान की तरफ‌ से कोई मालूमात भी नहीं दी जा रही है और मीडिया को भी जिनाह अस्पताल से दूर रखा गया है।

इन तमाम हालात के दरमयान ये सवाल उठने लगा है कि क्या सरबजीत की मौत हो गई है? सोशल साईट्स पर कुछ भारती ऐसा शक ज़ाहिर कर रहे हैं। पाकिस्तान के इंसानी हुक़ूक़ के कारकुन अंसार बर्न ने तो सरबजीत पर हमले के फ़ोरा बाद ऐसा बयान दिया था, जिस से ये शक गेराना फ़ित्री है। उन्हों ने कहा था कि सरबजीत को फांसी नहीं देना पड़े, इस लिए उसे मारने के लिए ये तरीक़ा इख़तियार किया गया हो सकता है।

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