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ख़लीजी कंपनीयों के लिए हिंदूस्तान भी कलीदी (अहमतरीन) उभरती मंडी

चूँकि पेटरो केमीकल प्रॉडक्ट्स के लिए तलब मशरिक़ (पूर्व) की तरफ़ बढ़ रही है, इस लिए हिंदूस्तान जहां बड़ी तादाद में मुतवस्सित तबक़ा है जो 2025 तक लग भग 400 मिलयन हो जाएगा, ख़लीज से ताल्लुक़ रखने वाली कंपनीयों के लिए सब से ज़्यादा अहम फ़रोग

चूँकि पेटरो केमीकल प्रॉडक्ट्स के लिए तलब मशरिक़ (पूर्व) की तरफ़ बढ़ रही है, इस लिए हिंदूस्तान जहां बड़ी तादाद में मुतवस्सित तबक़ा है जो 2025 तक लग भग 400 मिलयन हो जाएगा, ख़लीज से ताल्लुक़ रखने वाली कंपनीयों के लिए सब से ज़्यादा अहम फ़रोग़ पज़ीर मंडीयों में शामिल है, एक नए जायज़े में ये बात कही गई।

रोलैंड बर्गर स्ट्रेटजी कंसल्टेंट्स की जानिब से मुनाक़िदा जायज़े के मुताबिक़ नई मंडीयों की पुर एसतक़लाल अंदाज़ में फ़राहमी की ख़ातिर कंपनीयों को जामि मालूमात लाज़िमन हासिल करना चाहीए

ताकि टैक्नालोजीज़, रिसर्च और कारकर्दगी को बेहतर तौर पर आगे बढ़ा सकें जो इश्तिराक या फिर मुख़्तलिफ़ नौईयत के इदारों की हुसूलयाबी के ज़रीया हो सकता है।

इस के बरख़िलाफ़ यूरोप और अमेरीका में सालाना शरह तरक़्क़ी 1 फ़ीसद तक आस पास ही रहेगी। रिपोर्ट में कहा गया कि हिंदूस्तान ख़लीज की कंपनीयों के लिए सब से अहम फ़रोग़ पज़ीर मंडीयों में से एक है।

जहां यूरोपी और अमेरीकी पेटरो केमीकल कंपनीयों को मार्कीट में 1980 के दही में लग भग 62 फ़ीसद हिस्सा पर कंट्रोल हासिल था, जो पहले ही घट कर 2010 में महिज़ 30 फ़ीसद हो चुका है।

यूरोप में सख़्त तर माहौलियाती तहफ़्फ़ुज़ क़वानीन का मतलब है कि ये पेटरो केमीकल सैक्टर को वुसअत (एक्सटेंसन) नहीं मिलेगी।

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