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खातून के पेट से निकला 35 किलो का गोला

छत्तीसगढ के अंबिकापुर जिला अस्पताल के लेडी वार्ड में आज खातून स्पेस्लिस्ट शिप्रा श्रीवास्तव ने एक खातून का ऑपरेशन कर उसके पेट से 35 किलो का गोला निकाला है। ऑपरेशन के दौरान करीब दो बाल्टी पानी भी खातून के पेट से निकाला गया। डाक्टरो

छत्तीसगढ के अंबिकापुर जिला अस्पताल के लेडी वार्ड में आज खातून स्पेस्लिस्ट शिप्रा श्रीवास्तव ने एक खातून का ऑपरेशन कर उसके पेट से 35 किलो का गोला निकाला है। ऑपरेशन के दौरान करीब दो बाल्टी पानी भी खातून के पेट से निकाला गया। डाक्टरों की तरफ से किए गए इस कामयाब ऑपरेशन से खातून की जान बच गई।

डाक्टरों के मुताबिक जिला अस्पताल में अब तक का यह सबसे ब़डा मामला है, जिसमें किसी खातून के पेट से इतने वजन का गोला (ओबेरियन सिस्ट) निकला है। सूबे के बलरामपुर जिले के सनावल के साकिन बिफल खैरवार की बीवी शिवबसिया (35) को नाज़ुक हालत में पेट फूल जाने की वजह से पांच फरवरी को जिला अस्पताल के लेडी वार्ड में शरीक कराया गया था।

शिप्रा श्रीवास्तव ने उनका इलाज शुरू किया तो पता चला उसके पेट में बहुत ब़डा गोला है जो मरीज़ की जान के लिए खतरा है। डाक्टर ने पूरी जांच के बाद जुमेरात के रोज़ खातून का ऑपरेशन किया और 35 किलो के गोले को बाहर निकाल दिया। गोले के साथ करीब दो बाल्टी पानी भी पेट से निकाला गया। ऑपरेशन के बाद खातून की हालत अब खतरे से बाहर है।

डाक्टर ने बताया कि ज़्यादातर ख्वातीन के पेट में गोला बनता है लेकिन इसका साइज आधा किलो से लेकर लामहदूद (Unlimited) होता है। यह धीरे-धीरे पेट में बनता है और बढ़ने का रफ्तार भी काफी धीरे होती है इसलिए ख्वातीन को मालूम नहीं चलता और वे बीच-बीच में होने वाले दर्द को मामूली दर्द समझ ईलाज नहीं कराती। ज़्यादातर इंफेक्शन की वजह से ख्वातीन के पेट में गोला बनता है जो फेफ़डों और किडनी को डैमेज करता है।

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