Sunday , October 22 2017
Home / Uttar Pradesh / खुसूसी रियासत के लिए फिर तेज होगी जद्दो-जहद

खुसूसी रियासत के लिए फिर तेज होगी जद्दो-जहद

खुसूसी रियासत का सवाल एक बार फिर से जोर पकड़ेगा। एसेम्बली इंतिखाबात के पहले कई सियासी दल इस सवाल पर अपनी बात उठाने और मर्कज़ी हुकूमत पर दबाव बनाने की सियासत पर काम कर रहे हैं। झाविमो और आजसू मुसलसल तहरीक कर रहा है, जबकि भाजपा कई मौको

खुसूसी रियासत का सवाल एक बार फिर से जोर पकड़ेगा। एसेम्बली इंतिखाबात के पहले कई सियासी दल इस सवाल पर अपनी बात उठाने और मर्कज़ी हुकूमत पर दबाव बनाने की सियासत पर काम कर रहे हैं। झाविमो और आजसू मुसलसल तहरीक कर रहा है, जबकि भाजपा कई मौकों पर रियासत के लिए खुसुसि पैकेज की मुताल्बा कर चुकी है। मर्कज़ में यूपीए की हुकूमत होने की वजह से कांग्रेस अब तक इस मांग को ज्यादा अहमियत नहीं देती रही है।

हालांकि वह मांग करने की बजाय भाजपा पर दबाव बनाने की कोशिश करेगी। कहीं खुसूसी रियासत तो कहीं खुसुसि इक़्तेसादी पैकेज झाविमो और आजसू खुसुसि रियासत की दर्जा की मुताल्बा मुसलसल कर रहे हैं।

वहीं भाजपा और झामुमो इक़्तेसादी मदद के हिमायती हैं। कांग्रेस इस सवाल पर मर्कज़ की बजाय रियासती हुकुमत पर ही इल्ज़ाम मढ़ती रही। उसका कहना है कि रियासती हुकूमत ही मर्कज़ी मदद का पूरा फाइदा नहीं उठा पाती है। पैसा सरेंडर हो जाता है, लेकिन हुकूमत खर्च नहीं कर पाती।

झाविमो और आजसू ने हाल के महीनों में कई तहरीक किये हैं। झाविमो ने धरना-मुजाहिरा से लेकर कई प्रोग्राम किये। वहीं आजसू ने पूरे रियासत में तहरीक किया। बहरी से बहरागोड़ा तक इंसानी चैन बनाने जैसा तहरीक किया।

भाजपा ने कई बार तहरीक की ऐलान तो की, लेकिन हर बार उसे किसी न किसी वजह से टाल दिया गया। 2010 में दस्तखत मुहिम की ऐलान की गई थी, लेकिन आखिरी वक़्त में मुहिम मूअतिल कर दिया गया।

2014 में भी तहरीक की ऐलान की गई, लेकिन वह तहरीक हुआ नहीं। जब झाविमो और आजसू का तहरीक जोर पकड़ा तो भाजपा ने कहा कि हुकूमत में रहते कई बार इक़्तेसादी पैकेज के लिए मर्कज़ पर दबाव बनाया गया है।

अर्जुन मुंडा ने वजीरे आला रहते वजीरे आजम, वजीरे खजाना और मंसूबा कमीशन के नायब सदर को खत लिखकर खुसुसि पैकेज की मुताल्बा की थी। अब मर्कज़ में भाजपा की ही हुकूमत है। वह भी पूरी अकसरियत वाली। ऐसे में भाजपा अब सबकी नजर भाजपा पर होगी।

TOPPOPULARRECENT