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गठबंधन होते ही कांग्रेस के बदले सुर, ​पुराने नारों को मिटाने में जुटी

शम्स तबरेज़, सियासत न्यूज़ ब्यूरो।
लखनऊ: सत्ता भी अजीब चीज़ है। कभी पिता—पुत्र में बग़ावत करा देती है, तो कभी भाई, भाई के साथ भिड़ जाता है, तो कहीं बेटी नई पार्टी बनाकर मां को नाराज़ देती है, तो कहीं मां अपनी बेटी को चैलेंज करने पर उतारू है। कभी 27 साल यूपी बेहाल का नारा देने वाली कांग्रेस पार्टी कल तक जिस पार्टी की खामियां दिखाने में कोई कोर कसर छोड़ती थी, आज वो समाजवादी पार्टी के विकास के नारे लगाने में इतनी बेताब है, कि अपने पिछले नारों की पुताई कराने में जुट गई है। कांग्रेस ने कभी 27 साल यूपी बेहाल के नारे को लखनऊ के ट्रांसपोर्ट नगर हाईवे के पास हाईवे की रंग बिरंगी दिवारों पर लिखवाया था, लेकिन आज वो पिछले नारों को मिटाने में लगी है, जहां—जहां कांग्रेस ने यूपी के विकास में कसीदे लिखवाए थे, अब उनको मिटवाने के लिए उन नारों की पुताई करवा रही है, ताकि अब कोई यूपी के विकास पर सवाल न कर सके, क्योंकि कांग्रेस अब यूपी सरकार के साथ है। इसलिए कांग्रेस पार्टी भी अब सरकारी रंग में रंगी दिखने लगी है। कांग्रेस के सुर ऐसे बदल गए है, जैसे उसने कभी समाजवादी पार्टी की आलोचना किया ही नहीं। आज कांग्रेस, सपा गठबंधन में इतनी रमी झमी लग रही है, मानों एक साथ, एक सुर में गाना गा रहे हो कि ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा तो सुर बने हमारा’

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