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गणतंत्र दिवस और बच्चे

26 जनवरी को हम गणतंत्र दिवस के तौर पर मनाते हैं | ये वो दिन है जिस दिन हमें देश का संविधान मिला। और उसके साथ ही कुछ कर्तव्य और मौलिक अधिकार भी। लेकिन गणतंत्र दिवस की रौनक फीकी पड़ जाए अगर हमारे बच्चें गणतंत्र दिवस के स्वागत के लिए स्कूलों और कॉलेजों में तैयारी करना छोड़ दें।

जनवरी की शुरुआत से ही प्रत्येक शिक्षण संस्थाओं में शिक्षक बच्चों को इस दिन के स्वागत में लगा देते हैं। बच्चें भी खुशी-खुशी नाटक, राष्ट्रगान, कविता, संवाद में भाग लेते हैं ताकि आज के दिन अपने अतिथियों के सामने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दे सकें।

इस बारे में बिहार की राजधानी पटना के होली वीजन स्कूल की 7वीं की छात्रा शबनम कहती है “बहुत अच्छा लगता है जब हर साल 26 जनवरी के प्रोग्राम में शामिल होने का मौका मिलता है। पिछले साल हमने छुआछूत को मिटाने के लिए दोस्तो के साथ मिलकर नाटक किया था। सबने बहुत पसंद किया था। इस बार लड़कियों की शिक्षा पर एक नाटक दिखाने जा रहे हैं”।

कक्षा 6 के छात्र शाहिद बताते हैं “15 अगस्त और 26 जनवरी के मौके पर जिस तरह से टीचर देश के बारे और हमारे वीर जवानों के बारे बताती हैं, फिर हम प्रोग्राम के लिए तैयारी करते हैं उससे हम बच्चों को अच्छी जानकारियां मिल जाती हैं। किताबो में जिन क्रांतिकारीयों की बहादुरी की कहानी पूरे साल पढ़ते हैं स्टेज पर उनका रोल करने में बहुत मजा आता है”।

पांचवी में पढ़ने वाली प्रीती कहती हैं “26 जनवरी के दिन मां सुबह सुबह नहला कर, दो चोटी बनाती हैं। चोटिय़ों में तिंरगे झंडे वाले रंग के रीबन लगाना सबसे अच्छा लगता है। इस साल पहली बार दोस्तो के साथ राष्ट्रगान में साथ हूँ। मेरी टीचर ने मुझे बताया कि हमारा देश कितना अच्छा है और डॉक्टर भीम राव अंबेडकर ने संविधान बनाया ताकि हमसब एक साथ मिलजुल कर रहें और आपस में झगड़ा न करें”।

पटना विश्वविद्धालय के पत्रकारिता के छात्र पंकज के अनुसार “स्कूल के समय से ही 26 जनवरी के कार्यक्रमों में भाग लेता आया हूं। जिसके कारण मुझमें देश के लिए कुछ करने की चाह जागी और मैनें पत्रकारित का क्षेत्र चुना ताकि समाज की मुख्य धारा से जुड़कर देश हित मे कुछ अच्छा काम कर सकूं”।

कुछ शिक्षक अपने अनुभव को साझा करते हुए कहते हैं “दरअसल गणतत्रं दिवस की असली रौनक तो बच्चों से हो पाती है। गणतंत्र दिवस के लिए बच्चों का उत्साह हर साल देखते ही बनता हैं। आज देश में जिस तरह का माहौल बनता जा रहा है  सिर्फ ये बच्चों हैं जो देश को बचा सकते हैं। इसलिए हम प्रयास करते हैं कि कार्यक्रमों के बहाने बच्चों को देश की वास्तविक स्थिति से जोड़े ताकि जब ये बच्चें बाहर की दुनिया में जाए तो अपने हित के साथ समाज के बारें मे भी सोंचें”।

इसमें कोई संदेह नही कि बच्चे देश का भविष्य हैं और अगर कल हम अपने देश को सुरक्षित औऱ समृद्ध बनाना चाहते हैं तो आज इन बच्चों को अभिभावक, शिक्षक और बड़े भाई-बहन होने के नाते वैसी परवरिश देनी होगी ताकि बच्चें भविष्य़ मे उस देश का निर्माण कर सकें जिसका सपना कभी भीम राव अंबेडकर ने देखा था।

निकहत प्रवीन
पटना
(चरखा फीचर्स)

 

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