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गरीब अवाम को सूदख़ोरों से नजात दिलाने बैतुल माल वक़्त का तक़ाज़ा

सूदख़ोरों के मज़ालिम से गरीब अवाम को नजात दिलाने के लिए शहर में मुतहर्रिक बैतुल माल की ज़रूरत शिद्दत से महसूस की जाने लगी है। शहर के नौजवानों में छत्ता बाज़ार में हुए जावेद के क़त्ल के बाद सूदखोरों के ख़िलाफ़ ग़मो ग़ुस्सा की लहर पाई जाती है लेकिन नौजवान इस मसले के मुताल्लिक़ भी फ़िक्रमंद नज़र आ रहे हैं।

मुख़्तलिफ़ ग्रुप्स में होने वाले तबादले ख़्याल से ये नतीजा अख़ज़ किया जा रहा है कि नौजवान शहर में बिला सूदी क़र्ज़ फ़राहम करने वाले इदारों की ज़रूरत को महसूस कर रहे हैं और चंद एक सही आगे बढ़ते हुए बिला सूदी क़र्ज़ की फ़राहमी को यक़ीनी बनाने पर तवज्जा मर्कूज़ किए हुए हैं।

नौजवानों के ग्रुप्स जो कि मिल्लत के मआशी और तालीमी मुस्तक़बिल के मुताल्लिक़ फ़िक्रमंद हैं वो ग्रुप्स सूदखोरों के चंगुल से गरीब अवाम को बचाने के साथ साथ उन के तिजारती मक़ासिद की तकमील के लिए बिला सूदी क़र्ज़ की फ़राहमी के मंसूबे तैयार करने में मसरूफ़ नज़र आ रहे हैं।

ज़िला वरनगल में ख़िदमात अंजाम दे रहे बिला सूदी क़र्ज़ की फ़राहमी वाले एक इदारे की मिसाल अक्सर दी जाने लगी है और ये कहा जाने लगा है कि इस तरह के इदारों के ज़रीए मिल्लत की मआशी आसूदगी को दूर किया जा सकता है।

सूदखोरों से भारी सूद पर क़र्ज़ा जात हासिल करने वालों में छोटे ब्योपारियों की अक्सरियत है जिन की ज़रूरत मामूली रक़ूमात से पूरी हो जाती है लेकिन वो इन जरूरतों की तकमील के लिए दरकार रक़म से दो गुना और कभी तो कई गुना ज़्यादा रक़ूमात अदा करने पर मजबूर हैं।

छोटे ब्योपारी जोकि फुटपाथ या ठेले बंडी पर कारोबार करते हैं उन्हें बैंक की जानिब से जारी किए जाने वाले क़र्ज़ा जात के हुसूल के लिए रहनुमाई हासिल नहीं है और नाही वो बैंक के शराइत की तकमील को यक़ीनी बना सकते हैं।

बसूरत दीगर क़र्ज़ नादहिंदगान की तादाद में होने वाला इज़ाफ़ा एक मर्तबा फिर सूदी कारोबार में मुलव्विस अफ़राद की हौसला अफ़्ज़ाई का सबब बन सकता है।

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