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गिलानी दयानतदार , काबिल-ए-एहतेराम शख़्स नहीं

ईस्लामाबाद,११ जनवरी: (पी टी आई) पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने मुतहारिब वज़ीर-ए-आज़म यूसुफ़ रज़ा गिलानी को सख़्त तन्क़ीद का निशाना बनाते हुए कहा कि वो (गिलानी) कोई दयानतदार शख़्स नहीं हैं और ख़बरदार किया कि सदर आसिफ़ अली ज़रदारी के ख़िलाफ़ रि

ईस्लामाबाद,११ जनवरी: (पी टी आई) पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने मुतहारिब वज़ीर-ए-आज़म यूसुफ़ रज़ा गिलानी को सख़्त तन्क़ीद का निशाना बनाते हुए कहा कि वो (गिलानी) कोई दयानतदार शख़्स नहीं हैं और ख़बरदार किया कि सदर आसिफ़ अली ज़रदारी के ख़िलाफ़ रिश्वत सतानी के इल्ज़ामात के मुक़द्दमा की दुबारा कुशादगी का हुक्म ना देने की सूरत में इन (गिलानी) के ख़िलाफ़ कार्रवाई शुरू करदी जाएगी।

ज़रदारी को पहूँचाने वाली (रिश्वत के मुआमला ज़मीन) आम माफ़ी को बर्ख़ास्त करने से मुताल्लिक़ सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसला पर अमल आवरी के मुक़द्दमा की समाअत करनेवाली पाँच रुकनी बंच ने अपने हुक्म में कहा कि गिलानी कोई काबिल-ए‍एहतेराम शख़्स नहीं हैं क्योंकि उन्हों ने दस्तूरी हलफ़ की पाबंदी नहीं की है।

बंच ने कहा कि गिलानी ने बादियुन्नज़र में दस्तूर के बजाय अपनी स्याल जमात से वफ़ादारी का मुज़ाहरा किया है। बंच के इस रेमार्क से पी पी पी की ज़ेर क़ियादत हुकूमत पर दबाव में इज़ाफ़ा हो गया है। बंच ने सख़्त गीर लब-ओ-लहजा इख़तेयार करते हुए कहा कि वज़ीर-ए-आज़म बादियुन्नज़र में कोई इमानदार शख़्स नहीं हैं और उन्हों ने दस्तूरी हलफ़ की ख़िलाफ़वर्ज़ी की है।

बंच ने ये इस्तिदलाल किया कि ज़रदारी के ख़िलाफ़ रुकमी हेरफेर के मुक़द्दमात को दुबारा खोलने के लिए सोईस हुक्काम को मकतूब तहरीर करने से पाकिस्तानी पीपल्ज़ पार्टी के ज़ेर क़ियादत हुकूमत के इनकार से दस्तूर और क़ुरआन मजीद पर लिए गए हलफ़ की ख़िलाफ़वर्ज़ी के मुतरादिफ़ है। सुप्रीम कोर्ट बंच ने इस सूरत-ए-हाल से निमटने के लिए छः इक़दामात की फ़हरिस्त पेश की है।

जिस में वज़ीर-ए-आज़म के ख़िलाफ़ तहक़ीर अदालत पर कार्रवाई, यूसुफ़ रज़ा गिलानी को पाँच साल तक पारलीमानी रुकनीयत के लिए नाअहल क़रार देना, इस मुक़द्दमा को चीफ़ जस्टिस इफ़्तिख़ार चौधरी से रुजू करना भी शामिल है। इस बंच ने 16 जनवरी को इस मुक़द्दमा की समाअत की ग़रज़ से वसीअ तर बंच तशकील देने के लिए चीफ़ जस्टिस को सिफ़ारिश की है।

बंच ने अटार्नी जनरल अनवार उल-हक़ से कहा कि आइन्दा समाअत के दौरान हुकूमत के नज़रियात से अदालत को वाक़िफ़ किया जाए। बंच ने आइन्दा समाअत में अटार्नी जनरल के इलावा मोतमिद क़ानून और क़ौमी एहतिसाब ब्यूरो के चेयरमैन को हाज़िरी की हिदायत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने साबिक़ सदर परवेज़ मुशर्रफ़ की तरफ़ से 2009 में जारी करदा मंसूख़ कर दिया है जिस के तहत आसिफ़ अली ज़रदारी और दीगर आठ हज़ार अफ़राद को सर अहित मिली थी।

जिस के बाद से हुकूमत पर मुसलसल दबाव में इज़ाफ़ा हो रहा है कि ज़रदारी के ख़िलाफ़ रुकमी हेरफेर के मुक़द्दमात की दुबारा कुशादगी के लिए सोइस हुक्काम को मकतूब रवाना किया जाए। हुकूमत ने ये कहते हुए सुप्रीम कोर्ट अहकाम पर अमल करने से इनकार करदिया है कि दस्तूर के तहत सदर को इस्तिग़ासा की कार्रवाई का सामना करने से इस्तिस्ना हासिल है।

सदर ज़रदारी ने ये वाज़िह किया था कि तावक़ती के वो सदर के ओहदा पर फ़ाइज़ हैं हकूमत-ए-पाकिस्तान सोईस हुक्काम से रुजू नहीं होगी। पी पी पी हुकूमत और अदलिया कई मसलों पर एक दूसरे के ख़िलाफ़ मुतसादिम हैं।

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