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गिलाफे काबा की तबदीली

मक्का मुकर्रमा 12 सितम्बर: मक्का मुकर्रमा में गिलाफे काबा गिलाफ की तबदीली अमल में आई। एसे वक़्त जबकि तमाम हुज्जाज किराम मैदाने अर्फ़ात में जमा हैं , गिलाफ को तबदील किया गया उसे एक ख़ुसूसी फैक्ट्री में तक़रीबन 100 से ज़ाइद वर्कर्स ने तैयार किया है।

गिलाफ के मुख़्तलिफ़ हिस्सों पर ज़री और ख़ुसूसी प्रिंटिंग के अलावा उस की तैयारी में सोने-ओ-चांदी का भी इस्तेमाल किया जाता है। 14 मीटर तवील गिलाफे काबा में 120 किलो सोना और 25 किलो चांदी के धागे इस्तेमाल किए गए। इंतेहाई असरी फैक्ट्री में एम्ब्रॉयडरी का काम किया जाता है। हुज़ूर अकरम (सल्लललाहु अलैहि वसल्लम)के दौर में यमन से ख़ुसूसी कपड़े का ग़लाफ़ तैयार किया जाता था और उसे साल में दो मर्तबा रमज़ान उल-मुबारक से पहले और हज के दौरान तबदील किया जाता रहा है।

दौरे ख़िलाफ़त में भी इसी तरीका-ए-कार पर अमल होता रहा। इस के बाद मिस्र में माहिरीन गिलाफ के लिए तमाम दरकार अश्या की सरबराही और उसे तैयार करने के ज़िम्मेदार रहे। ख़िलाफ़त उस्मानिया में ग़लाफ़ काबा की तैयारी को ख़ुसूसी एहमीयत दी गई और मिस्र के मशहूर शहर में माहिरीन के लिए सहूलयात फ़राहम की गई। माज़ी में गिलाफ को कभी भी हटाया नहीं जाता था बल्के क़दीम ग़लाफ़ पर ही नया गिलाफ़ चढ़ाया जाता था।

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