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गीलानी नाअहल (अयोग्य)

* सुप्रीम कोर्ट की रोलिंग पर आज नए प्रधानमंत्री को तय करने कि उम्मीद‌ * पाकिस्तानी हुकूमत और कोर्ट‌ के दरमियान लगभग 30 माह की कशाकश आख़िर कार खत्म। * सत्तादार‌ पी पी पी ने अदालती फैसला उम्मीद के खिलाफ तुरंत‌ क़बूल कर लिया

* सुप्रीम कोर्ट की रोलिंग पर आज नए प्रधानमंत्री को तय करने कि उम्मीद‌
* पाकिस्तानी हुकूमत और कोर्ट‌ के दरमियान लगभग 30 माह की कशाकश आख़िर कार खत्म।
* सत्तादार‌ पी पी पी ने अदालती फैसला उम्मीद के खिलाफ तुरंत‌ क़बूल कर लिया

ईस्लामाबाद । ड्रामाई अंदाज‌ की तब्दीलियों में पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने आज प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गीलानी को नाअहल(अयोग्य) क़रार दिया और रोलिंग दी कि वो 26 अप्रैल से ही अपने ओहदे से अलग‌ होगए जब उस ने उन्हें अदालत कि तौहीन करने के जुर्म‌ में मुजरिम क़रार देते हुए सज़ा सुनाई।

हैरतज़दा सत्तादार पी पी पी ने तुरंत‌ इस फैसले को क़बूल कर लिया और फैसला किया कि 60 साला गीलानी को बदल दिया जाए, जो मार्च 2008 से प्रधानमंत्री रहे हैं। पी पी पी पार्लीमेंट्री पार्टी की मीटिंग कल होने कि उम्मिद‌ है जिस में उन कि जगह किसी और के बारे में फैसला किया जाएगा और इस ओहदे केलिए वफ़ाक़ी वुज़रा चौधरी अहमद मुख़तार, मख़दूम शहाब उद्दीन और ख़ूर्शीद शाह के नाम सुनने में आरहे हैं।

राष्ट्रपती आसिफ़ अली ज़रदारी ने मुल्क के लिए ज़बरदस्त सीयासी तबदीली के मद्देनजर‌ कल से अपने दो दिन के रूस के दौरे को रद कर दिया है, जहां वो इंटरनेशनल इकोनोमिक‌ फ़ोर्म की मीटिंग में शरीक होने के लिए जाने वाले थे। यूसुफ़ रज़ा गीलानी पार्लीमेंट सदस्य की हैसियत से नाअहल(अयोग्य) होचुके हैं। तीन सदसिय‌ बंच ने चीफ जस्टिस इफ़्तिख़ार चौधरी की कियादत‌ में ये बात अपने बहुत छोटे हुक्मनामे में कही जबकि लग भग दो माह पहले उन्हें राष्ट्रपती ज़रदारी के ख़िलाफ़ कई मिलियन डालर रिश्वत लेने के इल्ज़ामों को दुबारा खोलने के लिए स्विटज़रलैंड से दरख़ास्त करने से इनकार पर अदालत कि तौहिन‌ की पादाश में मुजरिम क़रार दिया गया था ।

अदालत ने कहा कि चूँकि इस फैसला (6 अप्रैल) के ख़िलाफ़ कोई अपील दायर नहीं की गई थी इस लिए सज़ा पुरी होचुकी है। लिहाज़ा सय्यद यूसुफ़ रज़ा गीलानी मज्लिसे शूरा (पार्लीमेंट‌) के सदस्य‌ बरक़रार रहने से नाअहल(अयोग्य) होचुके हैं और इस अदालत के फैसले 26 अप्रैल 2012 के एलान के तारीख और वक़्त से तमाम तर नतीजें शुमार होंगे।

इस ने और‌ कहा कि वो उपर लिखी गइ तारीख से ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की हैसियत से बरख़ास्त होचुके हैं और इस के मुताबिक़ प्रधानमंत्री का ओहदा खाली समझा जाएगा। इस हुक्मनामे में जो कोर्ट‌ और हुकूमत के दरमियान लग भग 30 माह की तल्ख़ लड़ाई का नतीजा है, अदालत ने इलेक्शन कमीशन को एसा एलामीया जारी करने की हिदायत भी दी जिस में बयान किया जाए कि गीलानी अब पार्लीमेंट सदस्य‌ नहीं हैं, जिस पर कमीशन ने चंद घंटे अंदर अमल करते हुए एक बाक़ायदा नोटिस जारी करते हुए गीलानी को पार्लिमेंट सदस्य की हैसियत से नाअहल(अयोग्य) क़रार दिया है।

अदालत ने ये भी कहा कि पाकिस्तान के राष्ट्रपती को दस्तूर के तहत ज़रूरी इक़दामात करने की ज़रूरत है ताकि मुल्क में हुक्मरानी के पार्लीमेंट्री निज़ाम के ज़रीये जमहूरी अमल की बरक़रारी को यक़ीनी बनाया जा सके। ये वाज़िह नहीं है कि हुकूमत इन फैसलों से किस तरह निमटेंगी जो प्रधानमंत्री और उन की केबीनेट‌ ने 26 अप्रैल से कर रखे हैं।

आज का फैसला उन कई अर्ज़ियों के जवाब में सामने आया जिन्हों ने क़ौमी असेंबली की स्पीकर फहमीदा मिर्ज़ा के इस फैसले को चैलेंज किया था कि गीलानी को उन की सज़ा दिही के पेश नज़र नाअहल(अयोग्य) क़रार ना दिया जाए।

अदालती फैसला के तुरंत‌ बाद सत्तादार‌ पाकिस्तान पीपल्ज़ पार्टी सर जोड़ कर बैठ गई ताकि हालात‌ का जायज़ा लिया जा सके। पी पी पी की मर्कज़ी क़ियादत की मीटिंग ने राष्ट्रपती ज़रदारी और उन के बेटे‍ और पार्टी चेयरमैन बिलावल भुट्टो ज़रदारी की मुश्तर्क सदारत में फैसला किया कि गीलानी के ख़िलाफ़ फ़ाज़िल अदालत की रोलिंग को क़बूल कर लिया जाए, पार्टी ज़राए(सुत्रो) ने ये बात कही ।

उन्हों ने बताया कि मर्कज़ी क़ियादत ने गीलानी की जगह नए लीडर के इंतिख़ाब(चुनाव) के लिए पी पी पी की पार्लीमेंट्री पार्टी और सत्तादार‌ इत्तिहाद के सदस्यों की अलाहीदा मीटिंगे तलब करने का फैसला किया है। फ़ाज़िल अदालत की रोलिंग की सियासी हलक़ों में कुछ वक़्त से उम्मीद‌ की जा रही थी लेकिन हैरान कुन बात ये रही कि पी पी पी ने तेज़ी से अदालती फैसला को क़बूल कर लिया है । गीलानी को 26 अप्रैल को मुजरिम क़रार देते हुए एक मिनट से भी कम वक़्त के लिए अलामती सज़ा दी गई थी। गीलानी ने तब अस्तेफा देने से इनकार किया था हालाँकि फ़ाज़िल अदालत ने इस वक़्त कहा था कि इन की सज़ादही उन की ना अहलीयत(अयोग्य) का सबब‌ बन सकती है।

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