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गुजरात में मोदी की टॉफ़ी मॉडल तरक़्क़ी का पर्दा फ़ाश

नायब सदर कांग्रेस राहुल गांधी ने आज गुजरात में मोदी की टॉफ़ी मॉडल तरक़्क़ी का पर्दा फ़ाश करते हुए कहा कि ये अवामी रक़म की खुली लूट मार है। गुजरात की तरक़्क़ी का नमूना टॉफ़ी मॉडल या गुब्बारा मॉडल कहा जा सकता है। टाटा और अडानी जैसे लो

नायब सदर कांग्रेस राहुल गांधी ने आज गुजरात में मोदी की टॉफ़ी मॉडल तरक़्क़ी का पर्दा फ़ाश करते हुए कहा कि ये अवामी रक़म की खुली लूट मार है। गुजरात की तरक़्क़ी का नमूना टॉफ़ी मॉडल या गुब्बारा मॉडल कहा जा सकता है। टाटा और अडानी जैसे लोगों के फ़ायदे के लिए अवामी सरमाया लौटा जा रहा है।

अपनी 20 मिनट की तक़रीर में राहुल गांधी ने गुजरात की तरक़्क़ी की हक़ीक़त ज़ाहिर करने के लिए कई वाक़ियात का हवाला देते हुए बी जे पी पर इल्ज़ाम लगाया कि वो मुल्क गीर सतह पर अपने नज़रिये की तशहीर कररही है ताकि मोदी को वज़ीर-ए-आज़म बनासके। टॉफ़ी मॉडल तरक़्क़ी के इल्ज़ाम की तफ़सीलात बयान करते हुए उन्होंने कहा कि काश्तकारों की मिल्कियत 45 हज़ार एकर‌ अराज़ी एक शख़्स को (अडानी को) एक रुपये फ़ी मुरब्बा मीटर की शरह पर फ़रोख़त करदी गई जो एक टॉफ़ी की क़ीमत के मुसावी है।

3 हज़ार करोड़ रुपये की ख़तीर रक़म मालियती अराज़ी ईसी शख़्स को 30 करोड़ रुपये में फ़रोख़त करदी गई। टाटा मोटर्स को 0.1 फ़ीसद सूद पर 10 हज़ार करोड़ रुपये का क़र्ज़ दिया गया जबकि आम आदमी को बैंक 12 फ़ीसद शरह सूद पर क़र्ज़ देता है। हुकूमत गुजरात का तालीमात, सेहत और दीगर फ़लाही शोबों का जुमला बजट 10 हज़ार करोड़ रुपये से भी कम है।

राहुल गांधी ने कहा कि गुजरात की इस के बरअक्स तस्वीर पेश की जा रही है जबकि रियासत में 40 लाख अफ़राद ख़त ग़ुर्बत की सतह से नीचे ज़िंदगी गुज़ार रहे हैं। उन की आमदनी रोज़ाना 11 रुपये है। उन्होंने कहा कि हिन्दुस्तान को उल्लो बनाना बंद करो, बिहार में बिहार का नमूना चलेगा, उन्होंने कहा कि गुजरात की तरक़्क़ी में मोदी के सिवाए किसी का भी हिस्सा ना होने का दावा बेबुनियाद है।

और वो पूरे मुल्क के बारे में भी यही दावा आइन्दा करसकते हैं। बिहार में राहुल गांधी की ये दूसरी तक़रीर थी। अक़िलीयत की ग़ालिब आबादी वाले इलाक़ा किसान गंज में कांग्रेस उम्मीदवार मौलाना इसरार उल-हक़ की ताईद में जल्सा-ए-आम से ख़िताब करते हुए नायब सदर कांग्रेस ने कहा कि मौजूदा पारलीमानी इंतेख़ाबात 2 अफ़राद नहीं बल्कि दो नज़रियात के दरमियान तसादुम है।

पहला नज़रिया कांग्रेस का है जो हर शख़्स को चाहे वो हिंदू हो या मुस्लिम निचली ज़ात का हो या आला ज़ात का, ग़रीब हो या अमीर, सब को तरक़्क़ी देना चाहती है। दूसरी तरफ़ बी जे पी है जिस का मक़सद मुसलमानों के ख़िलाफ़ हिंदूओं को मुक़ाबले के लिए खड़ा करना है। महाराष्ट्रा में उसी ने बिहार के अवाम को ज़द्द-ओ-कूब करने और कर्नाटक में ख़वातीन पर हमले करने के लिए अवाम को उकसाया था।

उन्होंने कहा कि बी जे पी बरहमी और ग़रूर से भरपूर है। जबकि हम इज़हार-ए-ख़्याल बरहमी या ग़रूर के ज़ेर-ए-असर नहीं कररहे हैं। कांग्रेस का मुस्तक़बिल का प्रोग्राम ग़रीब अवाम बिशमोल कुलीयों, ड्राईवरों, रक्षा रानों, मुसलमानों, नौजवानों और दीगर अफ़राद से तबादला-ए-ख़्याल है ताकि ग़रीबों के लिए सेहत, रिहायश गाह और उम्र रसीदा अफ़राद को आइन्दा पाँच साल में वज़ीफे को तरजीही बुनियादों पर यक़ीनी बनाया जा सके।

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