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गुलबर्ग सोसायटी फ़साद केस की समाअत मुअत्तल करने से इनकार

अहमदाबाद 19 नवंबर ( पी टी आई ) एक ख़ुसूसी अदालत ने आज 2002 के गुलबर्ग सोसायटी फ़साद मुतास्सिरीन की एक दरख़ास्त मुस्तर्द करदी जिस में इस्तिदा की गई थी कि इस मुक़द्दमा की समाअत उस वक़्त तक मुअत्तल करदी जाय जब तक ख़ुसूसी तहक़ीक़ाती टीम अपनी क़

अहमदाबाद 19 नवंबर ( पी टी आई ) एक ख़ुसूसी अदालत ने आज 2002 के गुलबर्ग सोसायटी फ़साद मुतास्सिरीन की एक दरख़ास्त मुस्तर्द करदी जिस में इस्तिदा की गई थी कि इस मुक़द्दमा की समाअत उस वक़्त तक मुअत्तल करदी जाय जब तक ख़ुसूसी तहक़ीक़ाती टीम अपनी क़तई रिपोर्ट पेश ना कर दे ।

मुक़द्दमा की समाअत कर रहे जज बी जे धनढा ने इस ख़्याल का इज़हार किया कि सुप्रीम कोर्ट ने इस केस में फ़ैसला सुनाने पर हुक्म इलतिवा जारी किया है ताहम मुक़द्दमा जारी रखने पर कोई हिदायत नहीं दी है ।

ऐस आई टी भी पहले ही कह चुकी है कि इस की जानिब से तहक़ीक़ात की क़तई रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट की हिदायत के मुताबिक़ मुनासिब अदालत में जलदी ही जारी की जाएगी। उन्हों ने कहा कि ऐस आई टी के तीक़न के बावजूद मुक़द्दमा की समाअत पर रोक लगाना मुक़द्दमा के मुफ़ाद में नहीं होगा।

अदालत ने एस् आई टी की पैरवी करने वाले ख़ुसूसी पब्लिक प्रासीक्यूटर आर सी को डैकर के इस इस्तिदलाल से इत्तिफ़ाक़ किया कि ये दरख़ास्त मुक़द्दमा के आख़िरी मराहिल में दाख़िल की गई है और अगर हुक्म इलतिवा जारी करदिया गया तो ये इन्साफ़ रसानी के मुफ़ाद में नहीं होगा। मुतास्सिरीन के वकील ऐस ऐम वोहरा ने हाइकोर्ट से रुजू होने केलिए अदालत के हुक्मनामा पर हुक्म इलतिवा जारी करने की इस्तिदा की ।

अदालत ने ताहम उसे भी मुस्तर्द करदिया और मिस्टर वोहरा से कहा कि मुबाहिस के जारी रहने के दौरान भी वो नज़रसानी दरख़ास्त हाइकोर्ट में पेश करसकते हैं। मुतास्सिरीन के वकील का इस्तिदलाल था कि जब तक इस केस से मुताल्लिक़ तमाम शवाहिद जमा नहीं होजाते उस वक़्त तक मुक़द्दमा की पेशरफ़त मुतास्सिर हो सकती है ।

उन्हों ने मज़ीद कहा था कि एस् आई टी ने सुप्रीम कोर्ट की हिदायत पर ज़किया जाफरी की दरख़ास्त की समाअत की है । इस मुक़द्दमा में भी गुलबर्ग केस के मुताल्लिक़ा पहलू निकलते हैं और तहक़ीक़ात के इस मवाद को भी अदालत के रूबरू पेश किया जायॆ ।

मिस्टर वोहरा ने इल्ज़ाम आइद किया कि ऐस आई टी कुछ ताक़तवर सियासतदानों और आली पुलिस ओहदेदारों को बचाने केलिए अदालत में मुताल्लिक़ा सबूत-ओ-शवाहिद पेश नहीं कर रही है जिन पर फ़साद मुतास्सिरीन ने फ़राइज़ की अंजाम दही में तग़ाफ़ुल का इल्ज़ाम आइद किया है ।

ऐस आई टी का अदालत में इस्तिदलाल था कि चूँकि ये दरख़ास्त महिज़ अदालती अमल को ताख़ीर का शिकार करने केलिए दाख़िल की गई है इस लिए उसे मुस्तर्द किया जाना चाहीए । मुल्ज़िमीन के वकील मितेश अमीन ने भी दरख़ास्त मुस्तर्द करने पर ज़ोर दिया और कहा कि ये मुक़द्दमा की समाअत को ताख़ीर का शिकार करने के मक़सद से दायर की गई है।

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