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गुलबर्ग हत्याकांड का फैसला नरेंद्र मोदी पर धब्बा : जस्टिस सच्चर

“दिल्ली हाइ कोर्ट के साबिक चीफ जस्टिस राजेंद्र सच्चर ने गुलबर्ग सोसायटी मामले में गुजरात की एक अदालत के आज आए फैसले को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर धब्बा बताया है।” पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) के साबिक सदर राजेंद्र सच्चर ने 14 साल पूराने गुलबर्ग सोसाइटी हत्याकांड में आज आए फैसले को प्रधानमंत्री पर धब्बा बताया क्योंकि उस कांड के वक़्त मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। जस्टिस सच्चर ने एक बयान में हिंदू उग्रराष्ट्रवादियों के सांप्रदायिक तौर-तरीके की भी निंदा की जो गुजरात में मुस्लिम परिवारों के घर गिराए जाने के बाद उन विस्थापित परिवारों के दूसरे इलाके में जाने का मुखालिफत कर रहे हैं। एक अखबार की खबर के मुताबिक वड़ोदरा के पास कपूराई इलाके के निवासियों ने वड़ोदरा नगर निगम को खत लिख सुलेमान चॉल में घर गिराए जाने के बाद वहां के लोगों को उनके इलाके में बसाए जाने का मुखालिफत किया है। करीब 300 विस्थापित परिवारों में ज़्यादातर मुसलमान हैं। खबर के मुताबिक खत में लिखा गया है कि मुसलमानों को उनके इलाकों में आने की इजाजत देने से यहां अमन के माहौल मुतासीर होगा क्योंकि उनकी रोजाना की गतिविधियों में मारपीट और गाली-गलौज शामिल है।

पूरे मुल्क को झकझोर कर रख देने वाले 2002 के गुजरात दंगों के दौरान हुए गुलबर्ग सोसाइटी हत्याकांड में आज फैसला सुनाते हुए विशेष एसआईटी अदालत ने मामले के 24 मुलजिमों को मुजरिम करार दिया जबकि 36 आरोपियों को बरी कर दिया। साथ ही अदालत ने सभी आरोपियों पर लगाए गए साजिश के आरोप भी खारिज कर दिए। विशेष एसआईटी अदालत के जस्टिस पी बी देसाई ने दोषी करार दिए गए 24 आरोपियों में से 11 को हत्या का कसूरवार ठहराया जबकि बाकी को अन्य आरोपों में दोषी करार दिया। कुल 66 आरोपियों में से छह की मौत सुनवाई के दौरान हो चुकी है। गौरतलब है कि गुजरात के बहुचर्चित गोधरा कांड के बाद रियासत में भड़के दंगों के दौरान हुए गुलबर्ग सोसाइटी हत्याकांड में कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी सहित 69 लोग मारे गए थे।

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