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गूगल देश के चार स्कूलों को बनाएगा हाईटेक

दिल्ली :गूगल देश के चार स्कूलों को हाईटेक बनाएगा. पढ़ने-पढ़ाने के तरीके में टेक्नोलॉजी शामिल की जाएगी. इसके लिए गूगल देश की चार एनजीओ की मदद लेगा. गूगल एनजीओ को 500 करोड़ रुपये से ज्यादा का फण्ड भी दे रहा है. गूगल का मानना है कि देश में स्कूल तो बहुत हो गए हैं, लेकिन पढ़ाई में गुणवत्ता नहीं आ रही है. गुरुवार को Google.org की ओर से एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था. कार्यक्रम में प्रथम बुक्स स्टोरी विवर को 3.6 मिलियन डॉलर, मिलेनियम स्पार्क फाउंडेशन 1.2, प्रथम एजूकेशन फाउंडेशन को 3.1 मिलियन डॉलर और लर्निंग इक्यूलिटी को 5 लाख डॉलर की मदद दी गई है.

लाखों डॉलर के बदले ये चाहता है गूगल
– पढ़ने-पढ़ाने के तरीके में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाए.
– भाषाई परेशानी को खत्म किया जाए, जिससे बातचीत के बीच में कोई बाधा न आए.
– टीचरों को अच्छी ट्रेनिंग दी जाए क्योंकि वो बेहतर नतीजे मिलने का रास्ता हैं.
क्यों शिक्षा के क्षेत्र में मदद करना चाहता है गूगल
साउथ-ईस्ट एशिया और भारत में गूगल के वाइस प्रेसीडेंट राजन आन्नदन बताते हैं कि-
– भारत में 16 लाख प्राइमरी-माध्यमिक प्राइवेट और सरकारी मदद से चलने वाले स्कूल हैं.
– 26 करोड़ बच्चे इन स्कूल में पंजीकृत हैं.
– 96 प्रतिशत बच्चे ग्रामीण क्षेत्रों के पंजीकृत हैं.
– एक लाख स्कूल ऐसे हैं जो एक-एक टीचर के भरोसे ही चल रहे हैं.
– क्लास तीन के 43 प्रतिशत बच्चे सिर्फ क्लास एक की किताब पढ़ पाते हैं.
– कक्षा पांच के 50 प्रतिशत बच्चे सामान्य किताब नहीं पढ़ पाते और गणित के सवाल हल नहीं कर पाते हैं.

क्या कहते हैं एनजीओ
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प्रथम बुक्स स्टोरी विवर की सुजैन सिंह का कहना है कि भारत और दूसरे विकासशील देशों में बच्चों की पढ़ाई के संसाधनों की बहुत कमी है. पर्याप्त भाषाओं में किताब नहीं हैं. हम हर बच्चे के हाथ में किताब देखना चाहते हैं. किताबों के इस अंतर को खत्म करने के लिए हमने आठ सितम्बर 2015 को स्टोरी विवर के नाम से आनलाइन प्लेटफॉर्म तैयार किया है. यहां 800 स्टोरी 24 भाषाओं में मौजूद हैं.
प्रथम एजूकेशन फाउंडेशन के वाइस प्रेसीडेंट लोकेश बजाज बताते हैं कि हम शिक्षा में ज्यादा से ज्यादा टेक्नोलॉजी को शामिल करने पर काम कर रहे हैं. टेक्नोलॉजी से कम खर्च में गुणवत्ता वाली शिक्षा दे रहे हैं. युवाओं के हुनर को बढ़ाने के लिए अवसर सामने ला रहे हैं. साथ ही इन सभी प्रयासों से शिक्षा और टेक्नोलॉजी के बीच की दूरी को कम की कोशिश कर रहे हैं.

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