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गैर परिकलित धन रखने वालों ने धार्मिक स्थलों का सहारा लिया!

हैदराबाद 16 नवंबर: देश में मुद्रा बदलने का घोषणा ने गैर परिकलित रक़ूमात परिवर्तन में धार्मिक स्थलों को दिए गए दान का जबरदस्त शोषण किया जाने लगा है और धार्मिक स्थलों मनादर ‘गोशालह’ मठ ‘आश्रम व अन्य स्थानों के जिम्मेदार ‘ओवरसियर और मतोलियान के अलावा प्रबंध समितियों के सदस्यों नोटों का परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने लगे हैं।

बाबाउं के आश्रम ‘गोशालह’ मनादर ‘मदरसों और धार्मिक स्थलों को किसी भी सीमा से छूट दिए जाने के बाद धनी इन धार्मिक स्थलों की ओर आकर्षित होने लगे हैं और इन स्थानों के अधिकारियों से सांठगांठ करते हुए भारी रक़ूमात मनादर और गोशालह की हांडयों में डाले जाने लगे हैं और इसी तरह कुछ और स्थानों मतोलियों व निगरान कारों के साथ साठगांठ कर के मरीदीन को कॉर्न्स में 1000 और 500 के नोट डाल देने की प्रेरणा दी जाने लगी है क्योंकि सरकार ने धार्मिक स्थलों को इन नोटों की सीमा से छूट करार दिया है।

यही हाल कुछ मदरसों का भी जिन धार्मिक इबादतगाहीं जुड़े हैं उन स्थानों पर भी यह भारी रक़ूमात डालने का सिलसिला जारी है ताकि 31 दिसंबर के बाद यह संस्था इन नोटों परिवर्तन के बाद हांडयों में डाला गया रक़ूमात को बआसानी बदल सकते हैं लेकिन उन्हें इस बात का शायद पता नहीं है कि उनकी यह गतियों सरकार की दृष्टि से छिपा नहीं है और सरकार की ओर से इन संस्थानों में जमा की जाने वाली और उनके धार्मिक स्थलों की ओर से बदल करवाई जाने वाली धन का अगर खुलासा होता है तो उनकी समाज में क्या ओकात रह जाती है। मनादर और गोशालह में एक विशिष्ट वाणिज्यिक वर्ग ने अपनी गैर परिकलित रक़ूमात प्रस्तुत की जाने लगी हैं जो 31 दिसंबर के बाद बिना किसी सीमा के बदलने का सरकार ने घोषणा कीया है।

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