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गोधरा फ़साद मुक़द्दमा में 21अफ़राद ( अपराधियो) को सज़ा ए उम्र कैद

ख़ुसूसी अदालत ने माबाद गोधरा दीप दा दरवाज़ा फ़सादाद मुक़द्दमा में 21 अफ़राद को सज़ा ए क़ैद और एक रिटायर्ड पुलिस ऑफीसर को एक साल जेल की सज़ा सुनाई जबकि 61दीगर ( अन्य) को बरी कर दिया । इस वाक़िया में एक ही ख़ानदान के 11अरकान बिशमोल 9 ख़वातीन और बच

ख़ुसूसी अदालत ने माबाद गोधरा दीप दा दरवाज़ा फ़सादाद मुक़द्दमा में 21 अफ़राद को सज़ा ए क़ैद और एक रिटायर्ड पुलिस ऑफीसर को एक साल जेल की सज़ा सुनाई जबकि 61दीगर ( अन्य) को बरी कर दिया । इस वाक़िया में एक ही ख़ानदान के 11अरकान बिशमोल 9 ख़वातीन और बच्चों का क़त्ल-ए-आम हुआ था ।

वाक़िया के एक दहिय से ज़ाइद ( ज्यादा) अर्सा बाद नामज़द ख़ुसूसी जज एस श्रीवास्तव ने 83मुल्ज़िमीन के मिनजुमला 61को बरी कर दिया है । बी जे पी के साबिक़ रुकन असेंबली प्रहलाद गोसा और साबिक़ म्यूनसिंपल सदर दिया भाई पटेल भी बरी कर दिए जाने वाले मुल्ज़िमीन में शामिल हैं ।

अदालत ने क़त्ल के संगीन इल्ज़ामात ( दफ़ा 302) और ताअज़ीरात-ए-हिंद की दफ़ा 120(B)( मुजरिमाना साज़िश ) को हज़फ़ करदिया । ये दफ़आत उन 21मुजरिमों के ख़िलाफ़ लगाई गई थीं जिन्हें सज़ाए उम्र क़ैद सुनाई गई है । जज ने उन्हें सिर्फ़ इक़दाम-ए-क़तल ( दफ़ा 307) और लूट मार का मुजरिम क़रार दिया ।

साबिक़ पुलिस इन्सपेक्टर वस नगर टाउन एम के पटेल को जिन्हें ख़िदमात की अंजाम दही में तसाहुल का मुजरिम क़रार दिया गया एक साल क़ैद की सज़ा सुनाई गई । अदालत ने छः मुल्ज़िमीन को फ़साद भड़काने पर दो साल की सज़ाए क़ैद सुनाई जो सज़ाए उम्र क़ैद के बाद दी जाएगी ।

मुक़द्दमा में जिन्हें मुजरिम क़रार दिया गया है उन पर 8 से 10हज़ार रुपय का जुर्माना आइद किया गया जबकि साबिक़ पुलिस इन्सपेक्टर पर 150 रुपय जुर्माना आइद किया गया । गोधरा ट्रेन आतिशज़नी के दूसरे दिन 28 फ़रवरी 2002 को महसाना में वसनगर टाउन के दीप दा दरवाज़ा इलाक़ा में मुश्तइल हुजूम ( भीढ़) ने एक ही ख़ानदान के 11अरकान बिशमोल ( जिसमें) 4 बच्चों और 5 ख्वातीन को हलाक कर दिया था ।

क़ब्लअज़ीं सज़ा की नौईयत पर बहस में हिस्सा लेते हुए स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर मुकेश बहिराम बट ने कहा कि ये जुर्म इंतिहाई संगीन है जिस में ख्वातीन और बच्चों का तला काट दिया गया । लिहाज़ा मुजरिमों को सख़्त से सख़्त सज़ा मिलनी चाहीए । ऐडवोकेट बी ऐस पटेल ने बाअज़ ( कुछ) मुल्ज़िमीन की पैरवी करते हुए कहा कि ये वाक़िया गोधरा ट्रेन आतिशज़नी का नतीजा है क्योंकि तशद्दुद हर तरफ़ फैल चुका था और मुजरिमीन ने ऑन वाहिद में ये हरकत की ।

उन्हों ने सज़ा सुनाने के मुआमला में रियायत बरतने की अपील की । ख़ुसूसी जज सरयू अस्तिव ने सिर्फ सज़ा पढ़ कर सुनाई और उठ कर चले गए । दीप दा दरवाज़ा मुक़द्दमा गोधरा ट्रेन आतिशज़नी मुक़द्दमा के बिशमोल नौ मुक़द्दमात में एक है । इस दौरान मुजरिमीन को दी गई सज़ा पर नाराज़ मुतास्सिरीन ( पीड़ीतो) के अरकान ख़ानदान ने फ़ैसला के ख़िलाफ़ अपील दायर करने का फ़ैसला किया है ।

यूसुफ़ ख़ान पठान जिनकी दो बेटियां और एक रिश्तेदार इस वाक़िया की नज़र हो गए कहा कि मैं अपने अरकान ख़ानदान से महरूम हो गया और अदालत ने मुजरिमों को जो सज़ा सुनाई है इस पर वो मुतमईन नहीं । उन्होंने कहा कि मेरी आँखों के सामने इन सब को हलाक किया गया और अदालत ने मुजरिमों को क़त्ल के इल्ज़ाम से बरी कर दिया वो इस फ़ैसला को ज़रूर चैलेंज करेंगे ।

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