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गोरखपुर को मिला ‘एम्स’ तो वोट बैंक जुटाने में लगे योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश: देश में बढ़ रही बीमारी और जनसंख्या को ध्यान में रखते हुए देश में जगह-जगह बड़े पैमाने पर हॉस्पिटल बनाने की जरुरत लगातार बाद रही है।  हॉस्पिटल, स्कूल, सड़कें यह सार विकास करने के लिए ही देश की सरकारें लोगों से टैक्स जुटाकर इन प्रोजेक्टों में लगाती है। मोटे तौर पर देखा जाए तो यह मूलभूत सुविधाएँ जनता का हक़ हैं जिन्हें लोगों को देना सरकार के लिए जरूरी है। ऐसे में लोगों के ही दिए हुए पैसे में से चंद पैसों का इस्तेमाल लोगों के लिए कर देश के राजनेता कुछ इस तरह की बयानबाज़ी करते हैं जैसे उन्होंने यह काम खुद के पैसों से किया हो।

ऐसा ही कुछ हो रहा है यू.पी. के गोरखपुर जिले में जहाँ के बीजेपी एमपी योगी आदित्यनाथ इलाके में मंजूर हुए एम्स इंस्टिट्यूट की मंजूरी को अपनी कामयाबी बताते हुए विकास का वादे पर खरा उतरने का दावा करते नज़र आ रहे हैं।

आपको बता दें कि पिछले काफी वक़्त से यूपी में एम्स इंस्टिट्यूट खोले जाने का प्रस्ताव सरकार के पास था लेकिन केंद्र सरकार और राज्य सरकार में आपसी तालमेल की कमी की वजह से इंस्टिट्यूट के लिए प्रस्तावित 3 साइट्स में से किसी को भी फाइनल नहीं किया जा पा रहा था। अब चूँकि अगले साल यूपी में चुनाव आने वाले हैं और भाषण देने के लिए साहेब को यूपी के गली-कूचों की धूल फांकनी होगी तो ऐसे में विकास के ऐसी 2-3 उदारण लेकर चलेंगे तब ही यूपी चुनावों में पार्टी के लिए जीत की कोई किरण नज़र आएगी।

शायद इसी दवाब के चलते पीएमओ ने 5 जुलाई को यू.पी. सरकार से संपर्क साध इस प्रोजेक्ट के लिए उपलब्ध जमीनों का बयौरा माँगा जिस पर यू.पी. सरकार ने पीएमओ को ३ साइट्स की जानकारी भेजी जिसमें से गन्ना शोध संस्थान की जमीन को प्रोजेक्ट के लिए बेहतरीन मान इसका चुनाव कर लिया गया इसके बाद अगले ही दिन 112 एकड़ के इस भूभाग को एम्स के नाम ट्रांसफर कर दिया गया।

ऐसे में सभी पार्टियों की तरह बीजेपी के आदित्यनाथ भी बाकी पार्टियों की ही तरह लोगों के हक़ को विकास का नाम देकर इसी विकास के नाम पर वोटर पक्के करने की कोशिश में लगे हुए हैं।

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