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गोवा में कांग्रेस की सरकार नहीं बनने के लिए क्या दिग्विजय सिंह जिम्मेदार हैं?

नई दिल्‍ली। उत्तर प्रदेश में करारी हार और गोवा,मणिपुर में सरकार बनाने में नाकामयाब रहने के बाद कांग्रेस पार्टी के अंदर मतभेद एक बार फिर आरंभ हो चुका है। कांग्रेस उपाध्‍यक्ष राहुल गांधी जहां पार्टी में बड़े बदलाव के संकेत दिये हैं वहीं पार्टी के वरिष्‍ठ नेताओं का मानना है कि अब पार्टी में बदलाव से क्‍या फायदा है।

इधर गोवा में 17 सीट जीतकर भी कांग्रेस सरकार बनाने में नाकामयाब रही। इसको लेकर भी पार्टी के अंदर हंगामा हो रहा है। गोवा की नाकामयाबी के लिए कहीं न कही कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह को जिम्‍मेदार बताया जा रहा है।

कांग्रेस छोड़ चुके विश्वजीत राणे ने दिग्विजय पर बड़ा आरोप लगाया है और उन्‍हें राजनीति से संन्‍यास ले लेने की सलाह तक दे डाली है। दिग्विजय पर हमला बोलते हुए पूर्व विधायक विश्वजीत राणे ने कहा कि दिग्विजय को अब राजनीति छोड़ देनी चाहिए।

राणे ने कांग्रेस छोड़ने के एक दिन बाद कहा, ‘मुझे नहीं पता कि दिग्विजय वास्तव में सरकार बनाना चाहते थे या नहीं। उनके क्रियाकलापों को देखते हुए नहीं लगता कि उन्होंने कुछ किया।’ चुनावों में 17 सीटें जीतने के बाद पार्टी कार्यालय में कांग्रेस विधायक दल की बैठक महज ‘मजाक’ थी।

बैठक लंबे वक्त तक चली। फैसला कुछ नहीं हुआ। वहीं भाजपा ने दिल्ली में नेताओं संग वीडियो कांफ्रेंसिंग से बैठक की। जल्द गंठबंधन कर लिया। इधर दिग्विजय सिंह अलग राग अलाप रहे हैं। दिग्विजय ने गोवा में सरकार नहीं बना पाने के लिए कांग्रेस नेताओं को जिम्‍मेवार ठहराया है।

उन्‍होंने कहा कि चुनाव से पहले गोवा फॉरवर्ड पार्टी के साथ गंठबंधन का प्रस्ताव उनकी ही पार्टी के नेताओं ने ही ‘नकार’ दिया था। गोवा के प्रभारी दिग्विजय ने कहा कि गोवा फॉरवर्ड पार्टी से गंठबंधन हो जाता, तो कांग्रेस को बहुमत मिलता। अब इस मामले में उन्हें ‘खलनायक’ बनाना ठीक नहीं है।

ट्वीट किया,‘रणनीति के तहत मैंने बाबुश मोनसराटेट की अगुवाईवाली क्षेत्रीय पार्टी और विजय सरदेसाई की गोवा फॉरवर्ड पार्टी से धर्मनिरपेक्ष गंठबंधन का प्रस्ताव दिया था। जबकि गोवा फॉरवर्ड पार्टी से गंठबंधन को हमारे ही नेताओं ने नकार दिया। अगर हमने गोवा फॉरवर्ड से गंठबंधन किया होता, तो हमारे पास 22 सीटें होतीं।

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