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ग्यारह साला इस्मत की इस्मत रेज़ि और क़तल की सी बी सी आई डी तहकीकात का मुतालिबा

हैदराबाद 08 जून: हिन्दुस्तान में मुसलमानों और गरीब दलितों की बदक़िस्मती ये हैके उन पर ज़ुलम-ओ-बरबरीयत के बावजूद ज़ालिमों को सज़ा नहीं होती बल्के क़ानून की रखवाली करने वाले चंद अनासिर चंद सकूं के बदले इन्हें क़ानून की गिरिफ़त में आने से

हैदराबाद 08 जून: हिन्दुस्तान में मुसलमानों और गरीब दलितों की बदक़िस्मती ये हैके उन पर ज़ुलम-ओ-बरबरीयत के बावजूद ज़ालिमों को सज़ा नहीं होती बल्के क़ानून की रखवाली करने वाले चंद अनासिर चंद सकूं के बदले इन्हें क़ानून की गिरिफ़त में आने से बचा लेते हैं।

पिछ्ले साल के अवाख़िर में दार-उल-हकूमत दिल्ली में मेडीकल कोर्स करनेवाली एक नौजवान लड़की की एक ख़ानगी बस में इजतिमाई इस्मत रेज़ि और फिर उसे इंतिहाई ज़ालिमाना अंदाज़ में जिस्मानी अज़ियतें देने का वाक़िया पेश आया।

इस वाक़िये के बाद सारे मुल्क खासकर दिल्ली में लोग सड़कों पर निकल आए। वज़ीर दाख़िला सुशील कुमार शिंदे के घर का घेराव‌ किया गया।

हैबत-ओ-परेशानी के आलम में वज़ीर आज़म डक्टर मनमोहन सिंह और यू पी ए सरबराह सोनिया गांधी ने ना सिर्फ़ आम लोगों से मुलाक़ात की बल्के मज़म्मती ब्यानात जारी किए।

यही नहीं बल्के एक ख़ुसूसी कमीशन क़ायम करते हुए इस्मत रेज़ि करने वालों को सख़्त से सख़्त सज़ा का बिल एवान में पेश किया गया।

दूसरी तरफ क़ौमी और इलाक़ाई टी वी चैनलों ने इस वाक़िये पर इस क़दर चीख-ओ-पुकार की के सारी दुनिया में इस होलनाक वाक़िये के चर्चे आम होगए और हिन्दुस्तान को ख़वातीन के लिए गैर महफ़ूज़ मुक़ाम तसव्वुर किया जाने लगा लेकिन इस वाक़िये के चार माह बाद हमारी रियासत के ज़िला नलगोंडा में एक ग्यारह साला छुट्टी जमात की गरीब ख़ानदान से ताल्लुक़ रखने वाली तालिबा के अग़वा और इजतिमाई इस्मत रेज़ि और क़तल का वाक़िया पेश आता है तो अवाम सड़कों पर निकल आते हैं ना ही सियासतदां लड़की के ग़मज़दा माँ बाप के आँसू पूछने के लिए आगे बढ़ते हैं सोनिया गांधी इस तरफ तवज्जा देती हैं और ना ही वज़ीर आज़म डक्टर मनमोहन सिंह कमसिन लड़की के साथ पेश आए दरिंदगी के वाक़िये पर इज़हार-ए-अफ़सोस करते हैं जबकि क़ौमी तो दुर की बात है इलाक़ाई और केबल टी वी चैनलों पर भी इस भयानक वाक़िये का चर्चा नहीं होता है बल्के टी वी चैनल्स इस वाक़िये को आम वाक़ियात की तरह नज़रअंदाज करदेते हैं।

इस तरह अख़बारात भी ज़ुलम-ओ-बरबरीयत की इस कहानी को शाए करने में श्रम-ओ-आर महसूस करते रहे। अब सवाल ये पैदा होता हैके नलगोंडा के मानेम चिल्का में पेश आए इस वाक़िये पर हर किसी ने ख़ामोशी इख़तियार क्यों की ? इस का सिर्फ़ एक जवाब है और वो ये हैके जिस लड़की का अग़वा करते हुए इस्मत रेज़ि की गई और फिर मौत की नींद सुला दिया गया वो मुसलमान थी और इस का एक और क़सूर ये था कि इस ने इंतेहाई गरीब ख़ानदान में आंखें खोलीं थीं।

क़ारईन 28 अप्रैल को मुस्तक़र नलगोंडा के कसीर आबादी वाले मुहल्ला मानपम चिल्का के रहने वाले गरीब शख़्स मुहम्मद सादिक़ अली चाँद और आमेना बेगम की तीन बेटियों में से सब से छोटी बेटी 11 साला इस्मत उनिस्सा बेगम का अग़वा और इजतिमाई इस्मत रेज़ि और फिर बहीमाना अंदाज़ में क़तल करके करीबी नाले में लाश फेंक दी गई।

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